अमेरिका-इजरायल ने B1 ब्रिज को किया था तबाह, अब ईरान ने खाड़ी के 8 पुलों को लेकर दे दी धमकी

अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के जो पुल क्षतिग्रस्त हुआ है वो पश्चिम एशिया का सबसे ऊंचा पुल था. इस पुल की ऊंचाई लगभग 136 मीटर थी और लंबाई एक हजार मीटर के करीब थी. ये पुल तेहरान को कराज शहर से जोड़ता था.

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अमेरिका के हमले के बाद ईरान भी खाड़ी देशों में पुलों को बनाएगा निशाना
NDTV
नई दिल्ली:

अमेरिका ने जब ईरान के सबसे बड़े पुल पर हमला कर उसे गिरा दिया तो इसी के साथ जैसे दोनों देशों के बीच संभावित शांति वार्ता का पुल भी तबाह हो गया.ईरान अपने इस पुल पर हमले से आगबबूला है और उसके इस गुस्से से खाड़ी के देश डरे हुए हैं. क्योंकि ईरान ने इस हमले के बदले में खाड़ी देशों के 8 पुलों को उड़ाने की धमकी दी है. ईरान का ये पुल पश्चिम एशिया का सबसे ऊंचा पुल था. इस पुल की ऊंचाई लगभग 136 मीटर थी  और लंबाई एक हजार मीटर के करीब थी. ये पुल तेहरान को कराज शहर से जोड़ता था. यह पुल 40 करोड़ डॉलर की लागत से बना था और ईरान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण था. ट्रंप ने इस हमले पर अपनी पीठ थपथपाई थी और ईरान को जल्दी से डील करने की धमकी दी थी. लेकिन ईरान कुछ और ही प्लान करता दिख रहा है. 

ईरान अपने ऊपर हमले की प्रतिक्रिया के तौर पर जिन आठ पुलों को उड़ाने का बात कर रहा है,उनमें एक कुवैत का  शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबा पुल है. 48 किलोमीटर लंबा ये पुल यह दुनिया के सबसे लंबे समुद्री पुलों में से एक है. ये कुवैत सिटी को सुबिया से जोड़ता है. यह करीब 30,000 करोड़ रुपये की लागत से बना  हैं.

दूसरा पुल संयुक्त अरब अमीरात का  शेख जायद पुल है जो बेहद जटिल स्थितियों में बनाया गया. यह  842 मीटर लंबा पुल हैं. ये अबू धाबी द्वीप को मेनलैंड से जोड़ता है. यह 30 करोड़ डॉलर की लागत से बना हैं.संयुक्त अरब अमीरात का अल मकता पुल भी इस सूची में है. यह यूएई के सबसे ऐतिहासिक बुनियादी ढांचों में से एक है. यह पुराने और नए अबू धाबी के बीच का पुल है.  इसका निर्माण 1968 में हुआ था. 

शेख खलीफा पुल भी निशाने पर

आपको बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात का शेख खलीफा पुल देश के सबसे विशाल पुलों में से एक है. ये  करीब 1.5 किलोमीटर लंबा पुल है. यह अबू धाबी के मुख्य शहर को सादियात द्वीप से जोड़ता है. सऊदी अरब का किंग फहद कॉज़वे पुल सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ता है. यह 25 किलोमीटर लंबा विशाल पुल है. ये सऊदी अरब-बहरीन के बीच आर्थिक जीवन रेखा हैं.

जॉर्डन की बैक बोन है किंग हुसैन ब्रिज

जॉर्डन का  किंग हुसैन ब्रिज जॉर्डन और वेस्ट बैंक को जोड़ता है. यह दुनिया के सबसे निचले पुलों में से एक है. ये पुल जॉर्डन नदी पर बना है. यह जॉर्डन-वेस्ट बैंक की अर्थव्यवस्था के लिए 'रीढ़ की हड्डी' है. जॉर्डन का  दामिया ब्रिज भी जॉर्डन नदी पर बने सबसे पुराने पुलों में से एक हैं. ये  नाब्लस और अम्मान को जोड़ता है. यह माल ढुलाई के लिए खास वैकल्पिक मार्ग है. जॉर्डन का  अब्दौन ब्रिज जॉर्डन का एकमात्र केबल-स्टेयड ब्रिज हैं. इसकी डिज़ाइन अनोखे 'Y' आकार की है. इसकी लंबाई लगभग 425 मीटर है. जाहिर है, इनमें से किसी भी पुल का गिरना पश्चिम एशिया को बिल्कुर थरथरा देगा.

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