जंग या समझौता? ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए बैठे, जानें क्या निकला नतीजा?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के एक सलाहकार ने वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अगर मुद्दा सिर्फ परमाणु हथियारों न बनाने तक सीमित रहता है तो दोनों देशों के बीच तुरंत एक समझौता हो सकता है.

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  • अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच ओमान की मध्यस्थता में तीसरे दौर की वार्ता जिनेवा में हो रही है
  • दोनों पक्षों ने करीब तीन घंटे तक बातचीत की. ओमान के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान ने सकारात्मक सुझाव दिए हैं
  • पिछले वार्ता प्रयास विफल होने के बावजूद दोनों देश अब कूटनीति के जरिए तनाव घटाने की कोशिश कर रहे हैं
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अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में तीसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता गुरुवार को शुरू हुई. इस वार्ता का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर डील करना और मिडल ईस्ट में संभावित भीषण जंग को टालना है. जिनेवा में ये वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी करते हुए मिडिल ईस्ट में अपने विमानों और युद्धपोतों का विशालकाय बेड़ा तैनात कर दिया है.

3 घंटे तक चली दोनों पक्षों में बातचीत

ओमान की मध्यस्थता में गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत चली. इसके बाद ओमान के विदेश मंत्री बदर अल्बुसैदी ने कहा कि दोनों पक्ष रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से अपनी-अपनी बात रख रहे हैं. दोनों पक्षों ने फिलहाल एक छोटा ब्रेक लेने का फैसला किया है. उम्मीद है, कुछ घंटे के बाद बातचीत फिर से शुरू होगी. 

ओमान को समाधान निकलने की उम्मीद

बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे अल्बुसैदी ने बताया कि ईरान की तरफ से क्रिएटिव और पॉजिटिव आइडिया दिए गए हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि वार्ता जब बातचीत फिर शुरू होगी तो इसमें और प्रगति देखने को मिलेगी. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ईरान ने अपना प्रस्ताव ओमान के जरिए अमेरिका को भेजा है, जिस पर वॉशिंगटन ने कुछ सवाल और टिप्पणियां वापस भेजी हैं. 

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ईरान बोला, तुरंत समझौते के लिए तैयार

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के एक सलाहकार ने भी इस मामले में सकारात्मक संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि अगर वार्ता का विषय सिर्फ परमाणु हथियारों न बनाने तक सीमित रहता है तो दोनों देशों के बीच तुरंत एक समझौता हो सकता है. हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने लंबी दूरी के मिसाइल प्रोग्राम या हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं करेगा.

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पहले हो चुकी दो दौर की नाकाम वार्ता

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर कड़े प्रतिबंध लगाना चाहते हैं, लेकिन परमाणु हथियार बनाने से इनकार कर रहा ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट का अपना अधिकार छोड़ने के पक्ष में नहीं है. उसका कहना है कि बिजली और अन्य चीजों के लिए यह जरूरी है. पिछले साल भी दोनों पक्षों के बीच दो दौर की वार्ता हुई थी, लेकिन जून में इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी 12 दिन की जंग के बाद वो प्रयास नाकाम हो गए थे. उस दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु केंद्रों पर भारी हमले किए थे. अब एक बार फिर कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें की जा रही हैं.

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ट्रंप और ईरान दोनों सीधी जंग के पक्ष में नहीं

ट्रंप भले ही ईरान की घेराबंदी करके लगातार धमकी दे रहे हैं, लेकिन वो भी पूर्ण युद्ध के पक्ष में नहीं हैं. ईरान कह चुका है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसके निशाने पर होंगे. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा रवाना होने से पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर जंग छिड़ी तो इसमें किसी की जीत नहीं होगी बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा. उन्होंने आगाह किया कि पूरा मिडिल ईस्ट इस आग की चपेट में आ सकता है.

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