- संयुक्त राष्ट्र टीम की रिपोर्ट में दिल्ली के लाल किले पर हुए आतंकी हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया गया है
- रिपोर्ट में जैश सरगना के महिला आतंकियों की नई विंग जमात-उल-मोमिनात बनाने को लेकर भी आगाह किया गया है
- यूएन रिपोर्ट में जैश को सक्रिय खतरा बताया गया है. पाकिस्तान का उसे निष्क्रिय बताने के दावे की पोल भी खोल दी है
दिल्ली के लाल किले पर पिछले साल हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर जो बात भारत में कही जा रही थी, उस पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक ताजा रिपोर्ट में मुहर लगा दी गई है. यूएन सुरक्षा परिषद की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले के तार पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे. रिपोर्ट में जैश द्वारा महिला आतंकियों की नई विंग तैयार करने पर भी गंभीर चिंता जताई गई है.
लाल किला हमले में जैश का हाथ
UNSC की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल 9 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आत्मघाती कार धमाके के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने के पुख्ता संकेत मिले हैं. इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सदस्य देश ने जानकारी दी है कि जैश ने न केवल इस हमले की जिम्मेदारी ली बल्कि वह इलाके में कई आतंकी गतिविधियों में भी शामिल रहा है.
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पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब
यूएन की इस रिपोर्ट ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के दावों की पोल खोल दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश सदस्य देश जैश को एक सक्रिय खतरा मानते हैं, वहीं एक सदस्य देश (संभवतः पाकिस्तान) उसे निष्क्रिय बता रहा है. पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा करता रहा है कि उसने जैश जैसे आतंकी संगठनों को पूरी तरह खत्म कर दिया है, लेकिन लाल किला हमले और नई महिला आतंकी विंग के गठन के ऐलान इन दावों को झुठलाते दिखते हैं.
आतंकी संगठनों से खतरा
यूएन की रिपोर्ट में केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर भी गौर किया गया है. इसमें बताया गया है कि जुलाई 2025 में एक अभियान के दौरान उन तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया था, जो अप्रैल में पहलगाम में हुए हमले में शामिल थे. पहलगाम हमले में 26 निर्दोष नागरिकों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था. रिपोर्ट दिखाती है कि जैश और उसके सहयोगी संगठन भले ही खुद को कमजोर या बिखरा हुआ दिखाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन उनकी फिर से संगठित होकर हमले करने की क्षमता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है.
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