न भूख, न प्यास और न मौत का खौफ...रूस के साथ जंग में यूक्रेन को सैनिकों की कमी, अब रोबॉट लड़ रहा है युद्ध!

यूक्रेनी अधिकारियों का लक्ष्य हर महीने करीब 35,000 रूसी सैनिकों को हताहत करने का है और उनका दावा है कि इस साल वे लगातार इस टारगेट को पूरा कर रहे हैं.

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हर महीने 35 हजार रूसी सैनिकों को ढेर करने का टारगेट है.

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां इंसान की जगह मशीनें बारूद बरसा रही हैं. चार साल से चल रहे इस विनाशकारी युद्ध में यूक्रेन को सैनिकों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इस कमी को कमजोरी बनाने के बजाय यूक्रेन ने युद्ध के मैदान में एक ऐसा खूंखार दांव खेला है, जिसने पूरी बाजी पलट दी है. यूक्रेन अब अपनी इंसानी फौज नहीं, बल्कि 'रोबोटिक आर्मी' को जंग के मैदान में उतार चुका है. ये ऐसे सैनिक हैं जिन्हें न भूख लगती है, न प्यास और न ही इन्हें मौत का डर है.

हालत यह है कि अब मोर्चे पर बिना एक भी यूक्रेनी सैनिक को भेजे, रिमोट कंट्रोल और स्क्रीन के जरिए पूरी की पूरी रूसी चौकियों को तबाह किया जा रहा है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उनकी सेना ने पहली बार सिर्फ रोबोट और ड्रोन की मदद से एक रूसी सैन्य ठिकाने पर कब्जा जमाया है.

बदल गया है जमीनी युद्ध का तरीका

युद्ध का तरीका इस कदर बदल चुका है कि जो कमांडर कभी अग्रिम मोर्चे पर आमने-सामने की खूनी लड़ाई लड़ते थे, वे अब फ्रंटलाइन से कोसों दूर बैठकर इस रोबोटिक खेल को अंजाम दे रहे हैं. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ही ऑपरेशन में विस्फोटक से लदे कई रोबोट्स को रूसी ठिकानों की तरफ रवाना किया जाता है. आसमान में उड़ रहे टोही ड्रोन से रूसी सैनिकों की हर हरकत पर नजर रखी जाती है और कंट्रोल सेंटर में बैठे यूक्रेनी ऑपरेटर्स स्क्रीन पर देखकर इन रोबोट्स को गाइड करते हैं.

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  • यूक्रेन के लिए यह तकनीक मजबूरी और रणनीति दोनों का हिस्सा बन चुकी है.
  • आबादी के मामले में रूस से काफी छोटे यूक्रेन ने पिछले चार सालों में अपने कई जांबाज सैनिकों को खोया है.
  • सैनिकों की कमी और पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य मदद पर मंडराते अनिश्चितता के बादलों के बीच, यूक्रेन ने ड्रोन और रोबोटिक गाड़ियों के उत्पादन को युद्ध स्तर पर बढ़ा दिया है.
राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से अब तक ये मानवरहित सिस्टम 22 हजार से ज्यादा मिशनों को अंजाम दे चुके हैं.

रूसी सेना में खौफ

यूक्रेन के इन जमीनी रोबोट्स ने रूसी खेमे में इस कदर खौफ पैदा कर दिया है कि पकड़े गए रूसी सैनिकों ने इन्हें एक खौफनाक नाम दिया है, वो है'साइलेंट डेथ' यानी खामोश मौत. रूसी सैनिकों का कहना है कि ये रोबोटिक बम कैरियर इतनी खामोशी से आगे बढ़ते हैं कि जब तक उनकी आवाज सुनाई देती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. अमूमन 10 मीटर की दूरी पर आने के बाद ही इनके आने का पता चलता है और तब तक पानी सिर से निकल चुका होता है.

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डोनबास के इलाके में कभी घर-घर जाकर आमने-सामने की जंग लड़ने वाले यूक्रेन के एक डिप्टी कमांडर 'बार' भी इस बदलाव से हैरान हैं. उनका कहना है, "मैंने कभी सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था. आज महसूस होता है कि अगर यह तकनीक हमारे पास पहले होती, तो मेरे कई साथी आज जिंदा होते. पहले युद्ध में आपकी ट्रेनिंग, अनुशासन और ताकत मायने रखती थी, लेकिन अब सब कुछ तकनीक तय कर रही है. अब यहां से पीछे लौटने का कोई रास्ता नहीं है."

हर महीने 35 हजार रूसी सैनिकों को ढेर करने का टारगेट

यूक्रेनी अधिकारियों का लक्ष्य हर महीने करीब 35,000 रूसी सैनिकों को हताहत करने का है और उनका दावा है कि इस साल वे लगातार इस टारगेट को पूरा कर रहे हैं.

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यूक्रेन की सोच यह है कि अगर रूसी सेना को इतना बड़ा नुकसान होगा, तो क्रेमलिन को शहरों और मध्यम वर्ग के परिवारों से जबरन भर्ती करनी पड़ेगी, जिससे रूस के अंदर पुतिन के खिलाफ असंतोष बढ़ेगा.

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी 'GCHQ' के हालिया अनुमान भी इस भयावह मंजर की तस्दीक करते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक रूस के करीब 5 लाख सैनिक मारे जा चुके हैं.

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