PAK-चीन को लेकर तुलसी गबार्ड का बड़ा बयान, बोलीं - उनके परमाणु हथियार अमेरिका के लिए खतरा

अमेरिका में नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कहा है कि पाकिस्तान, चीन समेत कुछ देश अपने परमाणु और पारंपरिक हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं और इनकी पहुंच सीधे अमेरिका तक है. 

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अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने बुधवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान, चीन समेत कुछ देश अपने परमाणु और पारंपरिक हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं और इनकी पहुंच सीधे अमेरिका तक है. 

अमेरिका में नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने पेशी के दौरान कहा कि इंटेलिजेंस कम्युनिटी का आकलन है कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान तेजी से अपनी मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं. ये देश नए, एडवांस और घातक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर शोध और विकास में जुटे हुए हैं.

तुलसी ने कहा कि इन देशों द्वारा तैयार की जा रही मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक दोनों ही तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं. सबसे चिंताजनक बात ये है कि इन मिसाइलों की मारक क्षमता इतनी अधिक है कि इन्होंने अब अमेरिका की मुख्य भूमि (Homeland) को अपनी सीधी रेंज में ले लिया है.

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तुलसी गबार्ड ने यह बात अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरों पर सीनेट कमिटी में सुनवाई के दौरान कही. उन्होंने इस दौरान दुनिया भर में खतरों पर इंटेलिजेंस कम्युनिटी की वार्षिक रिपोर्ट भी  पेश की. इस रिपोर्ट में चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान को सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है. 

तुलसी गबार्ड ने इस दौरान अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध को लेकर भी अपनी राय पेश की. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हमलों ने भले ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व और उसकी सैन्य क्षमताओं को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इसके बावजूद ईरान का शासन ढांचा फिलहाल बरकरार दिखाई देता है. 

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गबार्ड ने सीनेट कमिटी के सामने कहा कि पिछले जून में अमेरिका के ऑपरेशन मिडनाइट हैमर ने ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम को लगभग खत्म कर दिया था. ईरान ने उसके बाद अपनी एनरिचमेंट क्षमताओं को फिर से तैयार करने के प्रयास भी नहीं किए. अमेरिकी हमलों से ईरान की अंडरग्राउंड फैसिलिटीज के प्रवेश द्वार बर्बाद हो गए थे. 

रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुलसी ने कहा कि इंटेलिजेंस समुदाय का मानना है कि इस युद्ध में रूस को बढ़त मिली है. जब तक कोई एग्रीमेंट नहीं हो जाता, संभावना है कि रूस इस युद्ध को जारी रख सकता है, भले ही धीमी गति से. ये जंग तब तक जारी रह सकती है, जब तक कि उसके उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते 

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