- मिडिल ईस्ट में जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया है
- ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान से बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि शर्तें क्या होगी... ये सिर्फ संभावना है
- इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका से बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया था
मिडिल ईस्ट में 11 दिन से जारी भीषण जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार ईरान से बातचीत के संकेत दिए हैं. फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ बातचीत की संभावना से इनकार नहीं करते, लेकिन यह वार्ता पूरी तरह से शर्तों पर निर्भर करेगी. ट्रंप का ये बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ ही घंटों पहले ईरान ने किसी भी तरह की वार्ता से इनकार कर दिया था.
शर्तें क्या होंगी, वार्ता इस पर निर्भरः ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरव्यू में दावा किया कि उन्हें खबरें मिली हैं कि ईरान बातचीत के लिए काफी उत्सुक है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो ईरानी नेताओं से बात करने के इच्छुक हैं, तो ट्रंप का कहना था- ये संभव है, लेकिन निर्भर करता है कि शर्तें क्या होंगी. ये महज एक संभावना है, सिर्फ संभावना. ट्रंप ने आगे कहा कि वैसे तो हम किसी से बात करने के मूड में नहीं है, लेकिन अगर आप वाकई इसके बारे में सोच रहे हैं, तो यह मुमकिन है.
'सैन्य अभियान उम्मीद से ज्यादा कारगर'
ट्रंप ने इस दौरान कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान 'उम्मीदों से कहीं ज्यादा बेहतर' साबित हुआ है. उन्होंने ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों पर भी हैरानी जताई. बातचीत की उम्मीद के बीच ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई को लेकर अपना कड़ा रुख बरकरार रखा. ट्रंप ने साफ कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वह (मोज्तबा) शांति से रह सकते हैं.
ईरान ने वार्ता से किया था इनकार
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका से बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया था. अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका से बातचीत अब उनके एजेंडे में नहीं है. अमेरिका से पिछली वार्ता का अनुभव काफी कड़वा रहा है, ऐसे में संवाद की कोई गुंजाइश नहीं बची है.
जंग से पहले चल रही थी वार्ता
बता दें कि 28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान के ऊपर धावा बोला था, उससे ठीक पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों की जिनेवा में वार्ता हुई थी. उस दौरान मध्यस्थता कर रहे ओमान के विदेश मंत्री ने बातचीत के सकारात्मक दिशा में बढ़ने के दावे किए थे. लेकिन अचानक हमले और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए.
मध्यस्थता कराने में जुटे कई देश
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी युद्धविराम की कोशिशें चल रही हैं. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम घारीबाबादी ने हाल ही में कहा था कि चीन, रूस और फ्रांस सहित कई देश युद्ध रोकने के लिए उनके संपर्क में हैं.
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