- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने के निर्देश दिए हैं
- ट्रंप के आदेश के बाद कच्चे तेल की कीमतें गिरकर ब्रेंट क्रूड आयल के करीब बर्नल 92 डॉलर तक आ गईं
- मध्यपूर्व एशिया में युद्ध के कारण भारत के कच्चे तेल के आयात पर खर्च मार्च में 72 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को रक्षा विभाग को निर्देश देकर सबको चौंका दिया कि ईरान के साथ चल रही बैठकों और चर्चाओं के मद्देनज़र ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा अवसंरचनाओं के खिलाफ सभी सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाए. मिडिल ईस्ट एशिया में पिछले 24 दिनों से जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति के इस आदेश का दुनियाभर के बाज़ारों पर अच्छा असर पड़ा है, जो धीमी पड़ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संकट से जूझ रहे थे. इसका सबसे पहला असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा। ब्रेंट क्रूड आयल futures की कीमत सोमवार रात को एक समय ट्रेडिंग के दौरान करीब 92 डॉलर/बैरल तक पहुंच गई. कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज़्यादा की ये बड़ी गिरावट मंगलवार को भी जारी रह सकती है, क्योंकि इससे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में फंसे 700 से जहाज़ों को सेफ पैसेज मिलने की संभावना बन रही है.
घटे कच्चे तेल के दाम
मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध का ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर बहुत बुरा असर पड़ा है, और ट्रम्प के ऐलान से पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल और नेचुरल गैस की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं. दरअसल, इस युद्ध की वजह से भारत के कच्चे तेल के आयात पर खर्च पहले ही मार्च महीने में 72% से कुछ ज़्यादा बढ़ चुका है. पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यपूर्व एशिया में युद्ध की वजह से 20 मार्च, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत US$ 149.93/बैरल रही, जो 19 मार्च को बढ़कर US$ 156.29/बैरल के अप्रत्याशित स्तर पर पहुंच गयी थी.
कच्चा तेल महंगा होने की वजह से 01 मार्च से 20 मार्च, 2026 के बीच कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 119.28/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गयी है. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानि, मध्य पूर्व एशिया में युद्ध की वजह से कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत फरवरी 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 19 मार्च, 2026 तक 50.27 अमेरिकी डॉलर/बैरल तक बढ़ चुकी है, यानि 72.84% महंगी!
पीएम मोदी ने लोकसभा में दिया अहम बयान
"सरकार अलग-अलग देशों के सप्लायर्स के साथ भी लगातार संपर्क में है. प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई होती रहे. भारत सरकार गल्फ और आसपास के शिपिंग रूट्स पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं. हमारा प्रयास है कि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे. हम अपने सभी वैश्विक सहयोगों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं, ताकि हमारे मैरिटाइम कॉरिडोर सुरक्षित रहें."
इस चुनौती से निपटने के लिए मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से भारत सरकार ने तेल के आयात के लिए पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था को एक्टिवेट कर दिया था. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, और पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जा रहा है.
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28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद पिछले 24 दिनों में 6 जहाज तेल और गैस का स्टॉक लेकर भारत पहुंच चुके हैं. पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा, "भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइज़र जैसी अनेक जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती हैं. युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है. बावजूद इसके, हमारी सरकार का ये प्रयास रहा है कि पेट्रोल-डीज़ल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो, देश के सामान्य परिवारों को भी परेशानी काम से काम हो, इसपर हमारा फोकस रहा है."
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