ट्रंप का 'प्राइस बम': दवाओं की कीमतों में 700% तक की भारी कटौती, भारतीय फार्मा कंपनियों में हड़कंप!

ट्रंप का बड़ा फैसला और भारत पर असर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं की कीमतों में 300% से 700% तक की भारी कटौती करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है. उन्होंने मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) मॉडल लागू करने की बात कही है. जानें इसका क्या मतलब क्या है?

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दवाइयों के दाम 700% गिरे! ट्रम्प के एक सिग्नेचर ने उड़ा दी भारतीय फार्मा कंपनियों की नींद, अब क्या होगा? (फाइल फोटो)
PTI

World News in Hindi: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्लोबल फार्मा मार्केट में एक ऐसा 'तूफान' ला दिया है, जिसकी तपिश भारत तक महसूस की जा रही है. ट्रंप ने अमेरिका में मिलने वाली दवाओं की कीमतों में 300% से लेकर 700% तक की ऐतिहासिक कटौती का ऐलान किया है. इस फैसले ने न केवल अमेरिकी जनता को राहत दी है, बल्कि भारतीय दवा निर्यातकों (Indian Pharma Exporters) की रातों की नींद भी उड़ा दी है.

'दुनिया में जो सबसे सस्ता, वही अमेरिका में मिलेगा'

वाशिंगटन में एक हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि अब अमेरिका दवाओं के लिए मोटी रकम नहीं चुकाएगा. ट्रंप ने कहा, 'दशकों से अमेरिकी लोग दुनिया में सबसे महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. हम मोस्ट फेवर्ड नेशंस (MFN) प्राइसिंग लागू कर रहे हैं.' इसका मतलब यह है कि दुनिया के किसी भी देश में दवा की जो सबसे कम कीमत होगी, वही कीमत अब अमेरिका में भी लागू होगी.

भारतीय फार्मा सेक्टर पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

भारत को 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है. भारतीय कंपनियां अमेरिका को बड़े पैमाने पर सस्ती 'जेनेरिक दवाएं' निर्यात करती हैं. ट्रंप के इस नए फैसले से भारत पर दोतरफा मार पड़ सकती है. पहला- भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं. अगर अमेरिका इन कीमतों को अपना 'बेंचमार्क' बनाता है, तो वहां की कंपनियों का मुनाफा घटेगा, जिसका सीधा असर भारतीय सप्लाई चेन पर पड़ेगा. दूसरा- ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अन्य देशों को कीमतें कम करने के लिए मजबूर करने हेतु टैरिफ (Tariff) का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने कहा, 'बिना टैरिफ के हम यह लक्ष्य कभी हासिल नहीं कर पाते.'

बड़ी फार्मा कंपनियों के CEO के साथ 'ऐतिहासिक समझौता'

इस घोषणा के दौरान ट्रंप के साथ स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर (RFK Jr.), कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लुटनिक और डॉ. मेहमेट ओज़ जैसे दिग्गज मौजूद थे. साथ ही, नोवार्टिस (Novartis), सनोफी (Sanofi), और जीएसके (GSK) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों के CEOs ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'वे कंपनियां अब अमेरिका आ रही हैं और फैक्ट्रियां लगा रही हैं.'

भारत के लिए क्या बदल जाएगा?

भारतीय दवा उद्योग के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है. कीमतों में भारी फेरबदल से भारतीय कंपनियों के रेवेन्यू मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा. इस खबर के बाद सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज और सिप्ला जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की कड़ी नजर है. ट्रंप अब फार्मा मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका में ही शिफ्ट करने पर जोर दे रहे हैं, जिससे भारत से होने वाले निर्यात में कमी आ सकती है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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