ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की, क्या कूटनीतिक समाधान की राह और मुश्किल हो गई है?

मध्य-पूर्व की जंग में बड़ा मोड़. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग कर दी है. क्या ट्रंप के बयान से कूटनीतिक समाधान की राह और मुश्किल हो गई है? क्या है पूरा मामला?

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की, जिससे कूटनीतिक समाधान मुश्किल हो गया.
  • इजरायल ने लेबनान के बेरूत पर बड़े हमले किए, लाखों लोग बेघर हो गए.
  • जंग का असर वैश्विक बाजारों पर दिखा, तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

मध्य-पूर्व में चल रही जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने हालात को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है. ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान के साथ अब कोई समझौता नहीं होगा, जब तक वह बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं कर देता. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ कोई डील नहीं होगी, सिवाय उसके बिना शर्त आत्मसमर्पण के. उन्होंने यह भी कहा कि उसके बाद ईरान में एक नया और स्वीकार्य नेतृत्व चुना जाएगा और अमेरिका तथा उसके सहयोगी देश मिलकर ईरान को आर्थिक रूप से फिर से खड़ा करेंगे. जानकारों का मानना है कि ट्रंप की इस मांग ने कूटनीतिक कोशिशों को मुश्किल बना दिया है क्योंकि जब एक पक्ष से आत्मसमर्पण की शर्त रख दी जाती है, तो बातचीत की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान
Photo Credit: AFP

ट्रंप का यह बयान उस समय आया जब कुछ ही घंटे पहले ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने घोषणा की थी कि कुछ देशों ने इस संघर्ष को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें शुरू कर दी हैं. यह इस युद्ध को खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल का पहला संकेत माना जा रहा था. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे देश कौन-कौन हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि "हमें स्पष्ट रहना चाहिए. हम क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं. लेकिन अपने देश की गरिमा और अधिकार की रक्षा करने में हमें जरा भी हिचकिचाहट नहीं है." साथ ही ईरान के राष्ट्रपति ने ये भी कहा कि पड़ोसी देशों पर अब हमला नहीं होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि पड़ोसी देशों को तभी निशाना बनाया जाएगा जब ईरान पर वहां से हमला किया जाएगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ताजा बयान का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना शुरू हो गया है. यूरोप और अमेरिका के शेयर बाजार गिर गए, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. इसकी वजह यह है कि जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

ये भी पढ़ें: पड़ोसी देशों पर हमले नहीं करेगा ईरान, माफी भी मांगी, राष्ट्रपति पेजेशकियान ने किया रणनीति में बड़ा बदलाव

सर्वोच्च नेता के चयन में दखल का विरोध

इस बीच ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन में अमेरिका की भी भूमिका होनी चाहिए. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका की खुफिया एजेंसियां इस पर विचार कर रही हैं कि ईरान में नया नेतृत्व कौन हो सकता है. लेकिन ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि नया नेता केवल ईरान के संविधान और वहां की जनता की इच्छा के अनुसार चुना जाएगा, किसी विदेशी दखल के बिना.

Advertisement

Photo Credit: AFP

इजरायल का लेबनान पर फिर हमला

उधर जमीनी स्तर पर इजरायल ने ईरान और लेबनान पर नए हमले शुरू कर दिए. वहीं ईरान ने भी इजरायल और उन खाड़ी देशों की तरफ मिसाइलें दागीं जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. इन हमलों से पहले शहर के दक्षिणी इलाकों को खाली कराने का आदेश दिया गया था. इजरायल का कहना है कि उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया है जहां से ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसैनिक कमांड सेंटर संचालित हो रहे थे.

ये भी पढ़ें: कौन हैं इजरायल के नए रक्षा मंत्री, सख्त मिजाज के कैट्स कैसे बदल सकते हैं युद्ध की दिशा?

Advertisement

Photo Credit: AFP

हालांकि इस पर तुरंत ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड या हिज्बुल्लाह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. लेबनान में हालात बेहद खराब हैं. राहत संगठनों के मुताबिक पिछले चार दिनों में करीब तीन लाख लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं. कई लोग सड़कों, कारों और समुद्र किनारे रात बिताने को मजबूर हैं. राहत संगठन नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के मुताबिक पिछले चार दिनों में लेबनान में लगभग तीन लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं.

Advertisement

इजरायल का दावा- ईरान में खामेनेई के परिसर के नीचे बंकरों को तबाह किया

दूसरी तरफ ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले कर रहा है. खाड़ी के कई देशों संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब ने भी इन नए हमलों की जानकारी दी है. इजरायल ने दावा किया है कि उसके 50 युद्धक विमानों ने उस बंकर को निशाना बनाया जो अब भी ईरानी नेतृत्व द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था. यह बंकर तेहरान में खामेनेई के नष्ट हो चुके परिसर के नीचे मौजूद था.

Photo Credit: AFP

सैकड़ों की मौत, कब चल चलेगी जंग?

इस जंग में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. ईरान का दावा है कि हमलों में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं लेबनान में भी सैकड़ों लोग मारे गए हैं. इजरायल में भी कई लोगों की जान गई है, जबकि अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है.

Advertisement

इस बीच रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि रूस ईरान को मध्य-पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की लोकेशन की जानकारी दे रहा है. लेकिन अमेरिका में रूस के मिशनों ने इस रिपोर्ट पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. 

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लेविट ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ चल रहे अभियानों के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं. उनके अनुसार यह अभियान करीब चार से छह हफ्ते तक चल सकता है. 

हालात ऐसे हैं कि अब यह संघर्ष केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि धीरे-धीरे पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाला बड़ा जियो-पॉलिटिकल संकट बनता जा रहा है.

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: अमेरिका के अरबों रुपए स्वाहा | Syed Suhail | Trump | Bharat Ki Baat Batata Hoon