इस्लामाबाद में ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता शुरू, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान का मुद्दा अहम

ईरान जहां होर्मुज स्ट्रेट पर अपना दबदबा बनाए रखने के साथ-साथ यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ना चाहता है. वहीं अमेरिका का कहना है कि इस समझौते में 99 फीसदी हिस्सा ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना है.

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  • पाकिस्तान में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता स्थायी शांति के लिए शुरू हो गई है
  • ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर संप्रभुता, युद्ध हर्जाना, फ्रीज संपत्ति रिहाई और युद्धविराम की शर्तें रखीं हैं
  • अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग कमरों में रहेंगे, पाकिस्तानी अधिकारी उनका संदेश पहुंचाएंगे.
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इस्लामाबाद:

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उम्मीद जताई है कि यहां होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी. दोनों देशों की प्रतिनिधिमंडलों की रचनात्मक रूप से बातचीत करने की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए, शहबाज ने विश्वास जताया कि ये वार्ता क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में एक कदम साबित होगी.

तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, वार्ता से पहले ईरान ने लेबनान में इजरायल के हमले जारी रहने का मुद्दा उठाया और इन पर रोक लगाने की पुरजोर मांग की. बेरुत और दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले रोकने को युद्धविराम लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

शहबाज ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तारीफ की

ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने वार्ता में ईरान की सक्रिय भागीदारी की सराहना की है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व स्थिरता के प्रति पाकिस्तान का संकल्प दोहराते हुए कहा कि हम एक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि बातचीत की गति को बनाए रखा जा सके, जिसका मकसद आपसी सहयोग के जरिए विवादों का समाधान निकालना और दुनिया के सामने शांति का ठोस उदाहरण पेश करना है.

ईरान ने वार्ता के लिए रखीं 4 बुनियादी शर्तें

ईरान ने मध्यस्थ पाकिस्तान के सामने 4 बुनियादी शर्तें रखी हैं. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि वो इन पर किसी कीमत पर समझौता नहीं करेगा.
ये शर्तें हैं- 

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  1. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान की पूर्ण संप्रभुता सुनिश्चित करना
  2. हमलावर देश द्वारा युद्ध के नुकसान का पूरा हर्जाना देना 
  3. ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को बिना शर्त छोड़ना
  4. पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थायी युद्धविराम लागू करना 
     

पाकिस्तान इस वार्ता का मेजबान और मध्यस्थ दोनों है. पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इसहाक डार, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक कर रहे हैं.

अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन?

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं. उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल हैं. वहीं ईरानी दल में वार्ताकार, एक्सपर्ट्स और सुरक्षा अधिकारियों समेत 71 लोग शामिल हैं. दल की अगुआई ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं. दल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सेक्रेटरी अली अकबर अहमदियान और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलनसर हेम्मती शामिल हैं.

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इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हो रही है वार्ता

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद के सेरेना होटल में ठहरने की खबर है. बातचीत भी यहीं हो रही है. दोनों पक्ष एक ही होटल की छत के नीचे रहेंगे, लेकिन अधिकारियों के अनुसार दोनों टीमें आमने-सामने बैठकर बातचीत नहीं करेंगी. इसके बजाय, उन्हें अलग-अलग कमरों में बैठाया जाएगा और पाकिस्तानी अधिकारी एक कमरे से दूसरे कमरे तक संदेश पहुंचाने का काम करेंगे. कूटनीतिक भाषा में ऐसी अप्रत्यक्ष बातचीत को 'प्रॉक्सिमिटी टॉक्स' कहा जाता है.

अमेरिका और ईरान के बीच हो रही बातचीत पर दुनिया भर की नजर टिकी हुई है. इस वार्ता के लिए कई इंतजाम किए गए हैं, जिसमें आमने-सामने बातचीत और अलग-अलग कमरों में बातचीत, दोनों शामिल हैं. दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास और जंग से बाहर निकलने के बढ़ते दबाव के बीच यह वार्ता हो रही है.

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरानी डेलीगेशन के बीच आमने-सामने की बातचीत नहीं होगी. इसके बजाय, वो अलग-अलग कमरों में रहेंगे, जबकि पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच मैसेज पहुंचाएंगे.

ईरान जहां होर्मुज स्ट्रेट पर अपना दबदबा बनाए रखने के साथ-साथ यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ना चाहता है. वहीं अमेरिका का कहना है कि इस समझौते में 99 फीसदी हिस्सा ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना है.

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पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत को 'करो या मरो' वाला पल बताया है. यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब इलाके के हालात अस्थिर बने हुए हैं. वैसे तो तकनीकी सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में इजरायली ऑपरेशन जारी है, इससे डिप्लोमैटिक कोशिशें मुश्किल हो रही हैं.

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