युद्ध के मैदान से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट: दुबई की यात्रा और विमान में पसरा सन्नटा

दिल्ली से दुबई की यात्रा में क्या देखा और क्या महसूस किया बता रही हैं एनडीटीवी संवाददता तेजश्री पुरंदरे

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नई दिल्ली:

विमान के अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहली चीज़ जो मैंने महसूस की, वह थी एक अजीब-सी खामोशी. यात्री अपनी सीटों पर बैठे थे, सीट बेल्ट बंधी हुई थी, केबिन की लाइटें हल्की थीं,लेकिन माहौल किसी सामान्य अंतरराष्ट्रीय उड़ान जैसा नहीं लग रहा था. मैं दिल्ली से दुबई जा रही थी, जहां से मुझे मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष की रिपोर्टिंग करनी थी. विमान के उड़ान भरने से पहले ही यह साफ हो गया था कि यह यात्रा सामान्य नहीं होने वाली है.

विमान के अंदर पसरा तनाव

दिल्ली से मेरी फ्लाइट सुबह 9:30 बजे रवाना होने वाली थी. लेकिन क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण विमान को तुरंत उड़ान की अनुमति नहीं मिल सकी. एयरपोर्ट के गेट पर यात्रियों को बार-बार अलग-अलग घोषणाएं सुनने को मिल रही थीं. पहले बोर्डिंग का समय आगे बढ़ाया गया, फिर उड़ान को रोक दिया गया  समय बार-बार बदलता रहा. कुल मिलाकर बोर्डिंग गेट लगभग सात बार बदला गया. हर नई सूचना के बाद यात्री सूचना स्क्रीन की ओर देखते, यह समझने की कोशिश करते कि क्या फ्लाइट आखिरकार रवाना होगी या कई अन्य उड़ानों की तरह रद्द कर दी जाएगी.

जब आखिरकार हम विमान में सवार हुए, तब भी अनिश्चितता खत्म नहीं हुई थी. आम तौर पर दुबई जाने वाली उड़ानों में पर्यटक और छुट्टियां मनाने जा रहे परिवारों की भीड़ होती है. लेकिन यह उड़ान अलग महसूस हो रही थी. कई सीटें खाली थीं. जो यात्री थे भी, वे पर्यटकों जैसे नहीं लग रहे थे. उनमें से अधिकांश कारोबारी यात्री या दुबई में काम करने वाले लोग थे, जो भारत की यात्रा के बाद वापस लौट रहे थे.

दुबई पहुंचने की जद्दोजहद

विमान के दरवाजे बंद होने का इंतजार करते हुए मेरी बात मुझसे कुछ पंक्तियां आगे बैठे एक यात्री से हुई. वह चेन्नई से दुबई पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी यात्रा एक लंबा संघर्ष बन चुकी थी. वह पहले चेन्नई से मुंबई पहुंचे, लेकिन मुंबई से दुबई की उनकी फ्लाइट रद्द हो गई. इसके बाद उन्होंने दूसरे विकल्प की उम्मीद में मुंबई से दिल्ली की यात्रा की. लेकिन पिछली रात दिल्ली से जिस फ्लाइट से उन्हें जाना था, वह भी रद्द हो गई. उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरी रात एयरपोर्ट पर बिताई, बस इस कोशिश में कि किसी तरह दुबई पहुंच सकें. जब वह इस फ्लाइट में बैठे, तो उनके चेहरे पर थकान और निराशा साफ नजर आ रही थी.

विमान में बैठने के बाद भी उड़ान तुरंत शुरू नहीं हुई. विमान लगभग आधे घंटे तक रनवे पर खड़ा रहा, क्योंकि अधिकारी अभी भी मार्ग की अनुमति और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा की समीक्षा कर रहे थे. इस दौरान क्रू समय-समय पर यात्रियों को बता रहा था कि देरी सुरक्षा और क्लीयरेंस की प्रक्रिया के कारण हो रही है.

कुछ यात्री अपने फोन पर लगातार खबरें देख रहे थे. मेरे पीछे बैठे एक दंपति धीरे-धीरे प्रार्थना कर रहे थे कि विमान सुरक्षित रूप से उतर जाए. उनके लिए यह दुबई की पहली यात्रा थी और मौजूदा स्थिति ने उनकी यात्रा को उम्मीद से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया था.

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कैसा नजर आया दुबई

आखिरकार विमान धीरे-धीरे रनवे की ओर बढ़ने लगा. जब विमान ने उड़ान भरी, तो केबिन के भीतर एक हल्की-सी राहत जरूर महसूस हुई, लेकिन घबराहट पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी. कुछ घंटों की उड़ान के बाद जब विमान दुबई में उतरने लगा, तो केबिन का माहौल धीरे-धीरे बदलने लगा. जैसे ही विमान के पहिए ने रनवे को छुआ, कई यात्रियों ने राहत की सांस ली. कुछ लोग मुस्कुराए, तो कुछ ने तुरंत अपने फोन चालू कर परिवार को यह बताने के लिए संदेश भेजा कि वे सुरक्षित उतर चुके हैं.

दुबई एयरपोर्ट पर कामकाज जारी था, लेकिन माहौल सामान्य दिनों से थोड़ा अलग लगा. इस अंतरराष्ट्रीय हब पर आमतौर पर दिखाई देने वाली भीड़ काफी कम थी. सुरक्षा की मौजूदगी साफ दिख रही थी और कुछ क्षेत्रों में फिल्मांकन को लेकर सख्त निर्देश थे. कई जगह मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड करने पर भी रोक थी. मेरे लिए यह यात्रा उस क्षेत्र से रिपोर्टिंग की शुरुआत थी, जो इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचे हुए है.

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