पाकिस्तान में गैस की कीमतों में हैरत में डालने वाली वृद्धि, 235 फीसदी बढ़े दाम

पाकिस्तान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बीते 11 महीनों में पाकिस्तान सरकार का कुल कर्ज 15.3 फीसदी बढ़ गया

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पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रसोई गैस के दामों में ऐतिहासिक वृद्धि कर दी है (फाइल फोटो).
इस्लामाबाद:

पाकिस्तान (Pakistan) में शहबाज शरीफ सरकार (Shehbaz Sharif government) ने 1 जुलाई से प्राकृतिक गैस (LPG) की कीमतों में 43 प्रतिशत से 235 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है. इस वृद्धि के जरिए अधिकांश घरेलू और अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं से सरकार 660 अरब पाकिस्तानी रुपये (PKR) वसूलेगी. देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था के बीच बीते 11 महीनों में पाकिस्तान सरकार का कुल कर्ज 15.3 फीसदी बढ़ गया है. डॉन अखबार ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के हवाले से बताया कि जून 2021 में सरकार का कुल कर्ज 38.704 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये था, जो मई में बढ़कर 44.638 ट्रिलियन हो गया.

पेट्रोलियम राज्यमंत्री मुसादिक मलिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "लगभग आधे घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कीमतों में उछाल से बचाया गया है, लेकिन उच्च वर्ग पर बोझ काफी बढ़ गया है." यह फैसला पाकिस्तान की कैबिनेट की आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने लिया. ईसीसी ने उन घरेलू उपभोक्ताओं पर सबसे अधिक बोझ डाला, जिनकी मासिक गैस खपत चार क्यूबिक मीटर तक है.

अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, उन्हें अब पांच क्यूबिक मीटर गैस उपभोक्ताओं के साथ जोड़ा गया है. उनके लिए मौजूदा कीमतों से 154 प्रतिशत की वृद्धि होगी.

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने कहा, "ईसीसी ने पीकेआर 100 की प्रस्तावित दरों के मुकाबले निर्यात और गैर-निर्यात उद्योग (कैप्टिव पावर) के लिए गैस दरों को और कम करने के निर्देश के साथ उपभोक्ता गैस बिक्री कीमतों में प्रस्तावित संशोधन को मंजूरी दे दी."

पेट्रोलियम राज्यमंत्री ने कहा कि कीमतों में वृद्धि का उद्देश्य गैस क्षेत्र में सर्कुलर लोन को बढ़ाने से रोकना है. मुसादिक ने कहा, "कीमतों में अधिक वृद्धि का उद्देश्य इस वित्तीय वर्ष में गैस क्षेत्र में ऋण की बढ़त रोकना है."

पाकिस्तान में 2018 से ऊर्जा कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया में गैस की कीमतों में इजाफा किया है. वित्तीय क्षेत्र, बजट और वास्तविक अर्थव्यवस्था पर इससे भार पड़ा है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, मूल्य समायोजन में विलंब, डिफर्ड पेमेंट, प्रमुख निवेश को रोके रखना और गैर-लक्षित सब्सिडी देने सहित कई कारण हैं.

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पाकिस्तान सरकार का कर्ज 15 फीसदी से ज्यादा बढ़ा
देश में बिगड़ते आर्थिक हालात के बीच बीते 11 महीनों में पाकिस्तान सरकार का कुल कर्ज 15.3 फीसदी बढ़ गया है. डॉन अखबार ने बताया है कि जून 2021 में सरकार का कुल कर्ज 38.704 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये था, जो मई में बढ़कर 44.638 ट्रिलियन रुपये हो गया.

पाकिस्तान सरकार का घरेलू कर्ज और देनदारियां जून 2021 में जहां 26.968 ट्रिलियन रुपये थी, वहीं मई 2022 में यह बढ़कर 29.850 ट्रिलियन रुपये हो गई. 

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पाकिस्तान मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घरेलू लोन अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक गंभीर समस्या का कारण बनता है क्योंकि अधिकांश राजस्व का उपयोग ऋणों की अदायगी के लिए किया जाता है.

घरेलू ऋणों का आकार हर साल बढ़ रहा है जो सीधे वार्षिक विकास बजट के आकार में कटौती करता है. पाकिस्तान में सरकारें विकास योजनाओं के लिए अधिक राशि आवंटित करती हैं लेकिन घरेलू कर्ज बढ़ने के कारण वित्तीय वर्ष के अंत तक इनका आकार कम हो जाता है.

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डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कर्ज के बारे में यह खबर तब आई है जब 30 जून को समाप्त सप्ताह के दौरान एसबीपी के विदेशी मुद्रा भंडार में 493 मिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने विदेशी कर्जों का भुगतान किया, जिसने एक बार फिर से समाप्त वित्तीय वर्ष में अपने भंडार को 9.816 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक कम कर दिया. पाकिस्तान की कुल विदेशी मुद्रा होल्डिंग भी गिरकर 15.742 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई, जबकि वाणिज्यिक बैंकों का भंडार 5.926 बिलियन अमेरिकी डॉलर था.

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