अमेरिका-ईरान की वार्ता फेल तो अब होर्मुज का क्या होगा... 4 प्वाइंट्स में समझें इसका मतलब

अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल हो गई है. इस्लामाबाद में दोनों के बीच 21 घंटे बातचीत हुई लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. अब ईरान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज को लेकर भी जैसी स्थिति पहले थी, वैसी ही रहेगी.

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  • अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत विफल रही, क्योंकि ईरान ने अमेरिकी शर्तें स्वीकार नहीं कीं
  • ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने स्पष्ट किया कि होर्मुज की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा
  • 28 फरवरी से बंद होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग बीस प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई मार्ग है, जो बंद ही रहेगा
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इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की बातचीत को लेकर जो उम्मीद थी, वह टूट गई है. दोनों में हुई बातचीत फेल हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानीं. इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति नहीं बदलेगी. इसका मतलब हुआ कि होर्मुज को लेकर अब तक जो हालात थे, वही रहेंगे.

28 फरवरी से जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया है. ईरान और अमेरिका की बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट अहम मुद्दा था लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई है. ईरान होर्मुज पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है.

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इसका मतलब क्या हुआ?

  1. होर्मुज बंद रहेगा: 28 फरवरी के बाद से होर्मुज स्ट्रेट बंद है. यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल सप्लाई होता है. स्थिति जस की तस रहेगी यानी कि होर्मुज अभी भी बंद रहेगा.
  2. सीजफायर में भी बंद रहेगा: अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को दो हफ्तों का सीजफायर हुआ था. ईरान होर्मुज खोलने पर राजी हो गया था. लेकिन लेबनान पर इजरायली हमले के बाद 10 मिनट के अंदर इसे बंद भी कर दिया गया. अब भी शायद ये बंद ही रहे.
  3. ईरान का कंट्रोल रहेगा: IRGC की बात से साफ हो गया है कि होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल बरकरार रहेगा. इसका मतलब हुआ कि होर्मुज से ईरान की इजाजत के बगैर कोई जहाज नहीं गुजर सकेगा. ईरान चाहेगा तो जहाजों से टोल भी वसूलेगा.
  4. फंसे रहेंगे जहाज: दो हफ्तों के सीजफायर में तय हुआ था कि हर दिन 15 जहाज होर्मुज से गुजर सकते हैं. लेकिन CNN ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि होर्मुज की स्थिति में बदलाव नहीं होने का मतलब है कि जिन जहाजों की संख्या पर सहमति बनी थी, वे भी वहां से गुजर नहीं पाएंगे.

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आगे क्या होगा?

ईरान के एक सूत्र ने CNN से कहा है कि जब तक कोई साझा सहमति नहीं बन जाती, तब तक होर्मुज को लेकर स्थिति जैसी है, वैसी ही रहेगी.

ईरान का कहना है कि अमेरिका 'बहुत ज्यादा' मांग रहा था, इसलिए सहमति नहीं बन सकी. सूत्र ने बताया कि ईरान को 'कोई जल्दी' नहीं है. सूत्र ने चेतावनी दी कि अमेरिका अगर उसकी शर्तें नहीं मानता है तो होर्मुज स्ट्रेट बंद ही रहेगा.

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दो हफ्ते के सीजफायर पर बनी सहमति के दौरान जब ईरान ने अपनी 10 शर्तें रखी थीं, उसमें भी होर्मुज का मुद्दा शामिल था. ईरान ने अपनी शर्तों में कहा है कि वह होर्मुज पर अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहता है. ऐसा इसलिए क्योंकि होर्मुज पर कंट्रोल ही उसे मिडिल ईस्ट में पावर बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है.

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