तो व्हाट्सएप से डर गया रूस? नागरिकों पर नजर रखने पुतिन लाए 'मैक्स ऐप'

मैक्स ऐप के आने के बाद रूस में व्हाट्सएप की बैन होने की खबरें चल रही हैं. आप बता दें कि 70% से ज्यादा रूसी व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं.

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  • रूस एक नया डिजिटल डिवाइस लॉन्च करेगा, जिसमें मैक्स नामक मैसेंजर ऐप पहले से इंस्टॉल होगा
  • मैक्स ऐप मैसेजिंग, वीडियो कॉल, सरकारी सेवाओं और मोबाइल पेमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाएगा
  • विशेषज्ञों का कहना है कि मैक्स ऐप में छिपा सॉफ्टवेयर यूजर्स की जासूसी कर सकता है
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रूस एक नए डिजिटल डिवाइस को लॉन्च करने की तैयारी में है, जो एक बिल्कुल नए मैसेंजर ऐप से लैस होगा. ऐप का नाम है मैक्स. इसके जरिए मैसेजिंग और वीडियो कॉल की जा सकेगी. कहा ये भी जा रहा है कि व्हाट्सएप की जगह अब रूस की सरकार इस ऐप को इस्तेमाल में लाएगी. इतना ही नहीं एक्सपर्ट का मानना है कि 'मैक्स' के जरिए रूसी जनता की जासूसी की जाएगी. 

हर डिवाइस में होगा इंस्टॉल

द इंडिपेंडेंट के अनुसार , मैक्स नाम का ये ऐप इस साल सितंबर से रूस में बिकने वाले हर नए डिवाइस में इंस्टॉल किया जाएगा. ये न केवल मैसेजिंग और वीडियो कॉल के लिए इस्तेमाल होगा बल्कि सरकारी सेवाओं और मोबाइल पेमेंट भी इसके जरिए कर सकेंगे.

छिपे सॉफ्टवेयर के जरिए होगी जासूसी

हालांकि, द इंडिपेंडेंट के अनुसार, एक्सपर्ट का मानना है कि ऐप के सफेद और नीले लोगो के पीछे एक ऐसा सॉफ्टवेयर छिपा है जो एक 'जासूसी' का काम कर सकता है. ऐप के सर्वर रूस में मौजूद हैं, जिसका मतलब ये हुआ कि मैक्स रूसी नियमों-कानून में बंधा रहेगा. इससे सरकार की नजर इसके हर यूजर पर रह सकती है.

व्हाट्सएप होगा बैन?

मैक्स ऐप के आने के बाद रूस में व्हाट्सएप की बैन होने की खबरें चल रही हैं. आप बता दें कि 70% से ज्यादा रूसी व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं. रूसी सुरक्षा, राजनीति और मायाक इंटेलिजेंस के डायरेक्टर मार्क गेलोटी ने द इंडिपेंडेंट को बताया कि, 'मॉस्को अपने लोगों को मैक्स का इस्तेमाल करने के लिए कहेगा.

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अधिकारी रखेंगे हर बात पर नजर

रूसी विपक्षी पत्रकार आंद्रेई ओकुन ने कहा कि, 'मैक्स का इस्तेमाल 'डिजिटल गुलाग' बनाने के लिए किया जाएगा. इसके जरिए अधिकारी नागरिकों के खाली समय, इरादों और विचारों पर नजर रख सकेंगे.'

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिया आदेश

एक्सपर्ट का ये भी मानना है कि इस ऐप की शुरूआत राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर की जा रही है. रशियाज वॉर ऑन एवरीबॉडी के लेखक कीर गाइल्स ने द इंडिपेंडेंट को बताया कि, 'रूस समान्य रूप से इंटरनेट इस्तेमाल पर निगरानी रखना चाहता है. पर ये एक लंबा प्रोसेस है.

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कीर गाइल्स ने कहा कि, 'वेस्टर्न कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी से खतरा कोई नई बात नहीं है. ये ऐसी चीज है जिस पर रूसी सुरक्षा सेवाओं का ध्यान हमेशा से रहा है.' 

'रूसी सिक्योरिटी सर्विस को विदेशी ऐप से परेशानी'

गाइल्स आगे कहते हैं कि, 'रूसी सिक्योरिटी सर्विस इस बात से परेशान है कि रूसी लोग गूगल, स्काइप और हॉटमेल जैसे विदेशी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके मैसेज को पढ़ना और भी मुश्किल हो जाता है. रूसी सिक्योरिटी सर्विस हमेशा से वेस्टर्न कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को एक खतरा मानती रही हैं. इसलिए व्हाट्सएप जैसी सेवाओं पर लगाम लगाने की सालों की कोशिशों बाद रूसियों के लिए मैक्स लाया गया है.

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