बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर ध्यान दे दुनिया, US के 22 से ज्यादा शहरों में हुए प्रदर्शन

अमेरिका के 22 से ज्यादा शहरों में लोगों ने बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए. आर्टेसिया में सबसे बड़ी रैली हुई. प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग करते हुए मानवाधिकार उल्लंघन पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया.

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  • अमेरिका के 22 से अधिक शहरों में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किए गए थे.
  • कैलिफोर्निया के आर्टेसिया में सबसे बड़ी रैली हुई, जिसमें सैकड़ों लोग मानवाधिकारों की रक्षा के लिए जुटे थे.
  • प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हिंदुओं की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.
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अमेरिका के कई शहरों में शनिवार को हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर बांग्लादेश में कथित हिंसा के खिलाफ बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए. आयोजकों के मुताबिक, 22 से ज्यादा शहरों में रैली निकाली गई, जिनमें सबसे बड़ी भीड़ कैलिफोर्निया के आर्टेसिया में देखी गई, जहां सैकड़ों लोग सुबह मार्च में शामिल हुए.

प्रदर्शनकारियों ने इसे मानवीय अपील बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की. रैलियों में लोग 'ओम शांति' के नारे लगाते दिखाई दिए. आयोजकों ने कहा कि ये प्रदर्शन कानूनी, शांतिपूर्ण और गैर‑राजनीतिक थे और पूरी तरह मानवाधिकारों पर केंद्रित थे.

स्थानीय नेताओं ने बुलाया प्रदर्शन

आर्टेसिया की रैली स्थानीय समुदाय नेताओं और स्वयंसेवकों द्वारा आयोजित की गई. कई यहूदी और अन्य धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर शामिल हुए.

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ग्लोबल कोएलिशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ हिंदूज़ इन बांग्लादेश की मीडिया प्रतिनिधि गीता सिकंद ने कहा, 'हम चाहते हैं कि दुनिया कमजोर समुदायों की पीड़ा पर ध्यान दे. हम सुरक्षा, जवाबदेही और शांति की मांग कर रहे हैं.'

US के कई शहरों में प्रदर्शन

अमेरिका के पश्चिम, उत्तर‑पूर्व, मिडवेस्ट और दक्षिणी राज्यों में भी रैलियां हुईं. कई जगह प्रतिभागी कड़ाके की ठंड और माइनस तापमान में भी डटे रहे, जिसे उन्होंने 'स्थिति की गंभीरता' से जोड़ा.

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कई वक्ताओं ने हाल के महीनों में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हुए हमलों के अधिकार समूहों के दस्तावेजों का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की. कुछ समुदाय नेताओं ने 1971 के बांग्लादेश युद्ध के दौरान अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों को जनसंहार के रूप में मान्यता देने की अपील भी की.

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मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश, जहां 17 करोड़ की आबादी है, समय‑समय पर सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों पर हिंसा का सामना करता रहा है. बांग्लादेश सरकार का दावा है कि वह सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों पर कार्रवाई कर रही है.

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यूनुस सरकार की तीखी आलोचना

वर्तमान यूनुस सरकार पर अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा में विफल रहने के आरोप लगते रहे हैं. बीते महीनों में लिंचिंग और हत्याओं की कई घटनाएं सामने आने के बाद सरकार की भूमिका पर सवाल उठे हैं. प्रदर्शन ऐसे समय हुए हैं जब दो सप्ताह बाद बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव होने हैं और यूनुस सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया, जिससे आलोचना और तेज हुई है. आयोजकों ने कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य किसी शहर को बाधित करना नहीं बल्कि जागरूकता बढ़ाना है.

दक्षिण कैलिफोर्निया के हिंदू समुदाय नेता डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने कहा, 'हमारी आवाज उठाना पहला कदम है. हम सभी समुदायों के लिए शांति, सुरक्षा और सम्मान चाहते हैं.' आर्टेसिया की रैली के अंत में प्रतिभागियों ने हाथ पकड़कर मौन रखा और बढ़ती हिंसा पर वैश्विक ध्यान देने की अपील की.

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