- पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सैन्य बल प्रयोग का स्पष्ट रूप से विरोध किया है
- पाकिस्तान PM शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई जिसमें क्षेत्रीय शांति पर चर्चा हुई
- पाकिस्तान के उप प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री के साथ बातचीत की है
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान की तरफ से एक बड़ा बयान आया है. पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के बल प्रयोग का विरोध किया है. उसने विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करने को कहा है. पाकिस्तान की तरह से यह बयान उस समय दिया गया है जब एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करने की धमकी दे रहे हैं. उन्होंने खाड़ी में अपनी सैन्य तैयारी को पूरी तरह बढ़ा दिया है और ईरान को अल्टीमेटम दिया है कि अगर वह परमाणु समझौता नहीं करता है तो अमेरिका हमला कर देगा. इसी तरह यूरोप ने भी ईरानी सेना (रिवोल्यूशनरी गार्ड) को आतंकी सूची में शामिल कर दिया है. यानी कुल मिलाकर ईरान पर पश्चिमी दबाव चरम पर है.
दरअसल पाकिस्तानी प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच एक टेलीफोन कॉल पर बातचीत हुई है. इसके अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी संपर्क हुआ है. इसके बाद पाकिस्तान ने कई मंचों से अपना स्टैंड साफ कर दिया है. प्रधान मंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में, प्रधान मंत्री शहबाज ने खाड़ी क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर बातचीत और राजनयिक जुड़ाव के महत्व पर जोर दिया है.
अलग से, पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान के उप प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की है. उन्होंने ईरान को लेकर जो स्थिति बनी है, उसपर चिंता व्यक्त की और पाकिस्तान की स्टैंड को दोहराया है. पाक विदेश मंत्रालय के कार्यालय ने एक बयान में कहा डार ने उभरती क्षेत्रीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की और इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहार्य तरीका है.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए हमेशा शांति और कूटनीति की वकालत की है. शांति कूटनीति के लिए हमारी वकालत जारी है और यह हमारी घोषित स्थिति बनी हुई है. यह क्षेत्र (खाड़ी) युद्ध, उथल-पुथल बर्दाश्त नहीं कर सकता क्योंकि यह संक्षेप में आर्थिक विकास और समृद्धि को रोकता है. इसलिए, हमें उम्मीद है कि शांति और कूटनीति कायम रहेगी. हम बल के प्रयोग का विरोध करते हैं. हम ईरान के खिलाफ जबरदस्ती के कदम और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ हैं."
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान में विदेश नीति सरकार नहीं पाकिस्तान सेना के चीफ आसिम मुनीर तय करते हैं. यानी पाकिस्तान ईरान के साथ खड़ा होगा, यह मैसेज खुद मुनीर ही दे रहे हैं.













