पाकिस्तान के ‘डबल गेम’ पर नए सवाल? सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा ईरानी सैन्य विमान, मध्यस्थ बनने का कर रहा था ढोंग

ईरान-अमेरिका की जंग में मध्यस्थ बनने का ढोंग रच रहे पाकिस्तान की भूमिक पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. 25 अप्रैल 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर ईरान एयर फोर्स का C-130 सैन्य विमान खड़ा दिखाई देता है. यानी एक ओर तो पाकिस्तान शांति वार्ता का ढोंग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के लिए 'सेफ जोन' भी बन रहा है.

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ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने का दावा कर रहे पाकिस्तान पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों ने ऐसे संकेत दिए हैं कि इस्लामाबाद चुपचाप ईरान की सैन्य मदद भी कर रहा था. एक्सक्लूसिव सैटेलाइट इमेजरी में पाकिस्तान के संवेदनशील एयरबेस पर ईरान एयर फोर्स का सैन्य विमान दिखाई दिया है, जिसके बाद अमेरिका में भी तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है.

25 अप्रैल 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर ईरान एयर फोर्स का C-130 सैन्य विमान खड़ा दिखाई देता है. यह एयरबेस रावलपिंडी के चकलाला इलाके में स्थित है और इस्लामाबाद से महज करीब 10 किलोमीटर दूर है. यही वजह है कि इस खुलासे को सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है.

पाकिस्तान मध्यस्थ या ईरान का ‘सेफ जोन'?

इस खुलासे ने CBS न्यूज की उस रिपोर्ट को भी मजबूती दी है जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान ने अपने कुछ सैन्य और निगरानी विमानों को पाकिस्तान भेजना शुरू किया था. कहा जा रहा है कि इन विमानों को संभावित अमेरिकी या इजरायली हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान के एयरबेस इस्तेमाल किए गए.

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यानी एक तरफ पाकिस्तान खुद को अमेरिका-ईरान वार्ता का 'न्यूट्रल मेडिएटर' बता रहा था, दूसरी तरफ उसी दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस में जगह दे रहा था. इसी वजह से अब वॉशिंगटन में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

अमेरिकी सीनेटर का तीखा हमला

अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने इस मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान पर निशाना साधा. सीनेट की एक सुनवाई के दौरान उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री और सेना के शीर्ष अधिकारियों से कहा कि अगर पाकिस्तान वास्तव में ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस में छिपा रहा है, तो उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

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ग्रहैम ने कहा कि अगर पाकिस्तान ईरान की सैन्य संपत्तियों को बचाने में लगा है, तो फिर अमेरिका को किसी और देश को मध्यस्थ बनाना चाहिए. उन्होंने यह भी तंज कसा कि शायद यही वजह है कि अमेरिका-ईरान वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही.

पाकिस्तान ने कहा- ‘भ्रामक और सनसनीखेज रिपोर्ट'

हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया है. इस्लामाबाद ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें भ्रामक, सनसनीखेज और अटकलों पर आधारित हैं. पाकिस्तान का दावा है कि क्षेत्रीय शांति की कोशिशों को कमजोर करने के लिए इस तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं.

लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने बहस को और तेज कर दिया है, क्योंकि ईरानी विमान की पहचान उसके खास रेगिस्तानी रंग वाले कैमोफ्लाज से की जा रही है. पाकिस्तान एयर फोर्स के C-130 विमान आमतौर पर हल्के ग्रे रंग में होते हैं, जबकि ईरानी विमानों पर पीले-रेतीले रंग की स्कीम होती है.

1979 की क्रांति के बाद भी उड़ रहे वही विमान

ईरान ने अपने C-130 विमान शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के दौर में 1970 के दशक में हासिल किए थे. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यही विमान ईरानी एयर फोर्स के पास बने रहे. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को नए C-130 विमान नहीं मिले, इसलिए उसने पुराने विमानों को घरेलू मरम्मत और जुगाड़ तकनीक से चालू रखा.

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पहले भी पाकिस्तान पहुंच चुके हैं ईरानी विमान

यह पहली बार नहीं है जब तनाव के समय ईरान ने अपने विमान पाकिस्तान भेजे हों. इससे पहले जून 2025 में जब इजरायल ने 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब भी ईरानी विमान पाकिस्तान पहुंचे थे. उस दौरान कराची एयरपोर्ट पर ईरानी बोइंग 747 विमान खड़े देखे गए थे.

अब नई सैटेलाइट तस्वीरों ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान पर्दे के पीछे ईरान के लिए सुरक्षित सैन्य ठिकाना बनता जा रहा है.

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