पाकिस्तान ना इधर ना उधर, ईरान और इजरायल दोनों को कोसा,पब्लिक ईरान के साथ, मुनीर अमेरिका के साथ

पाकिस्तान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा की है, तो दूसरी ओर ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर किए गए जवाबी हमलों की भी आलोचना की है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों की निंदा करते हुए इसे अनुचित बताया है.
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान के खाड़ी देशों पर हमलों की आलोचना करते हुए संवेदनाएं व्यक्त की हैं.
  • कराची में अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया पर असर डाला है. हालांकि इस संकट में पाकिस्तान की स्थिति सबसे ज्यादा उलझी नजर आ रही है. एक ओर पाकिस्तान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा की है, तो दूसरी ओर ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर किए गए जवाबी हमलों की भी आलोचना की है. ऐसे में साफ है कि पाकिस्‍तान दो नावों की सवारी करने की कोशिश कर रहा है. कराची में जो कुछ हुआ है, वो पाकिस्‍तान की इसी उलझी सोच का नतीजा माना जा रहा है. 

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा की है और इन्‍हें अनुचित बताया है. वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान की ओर से सऊदी अरब और खाड़ी देशों में किए गए हमलों की आलोचना की है. साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान सरकार और जनता ईरान के लोगों के साथ उनके दुख और शोक की घड़ी में शामिल है और अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं. साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक पुरानी परंपरा रही है कि राष्ट्राध्यक्षों और सरकार को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ सकता है जनसैलाब, खुमैनी के अंतिम संस्‍कार में जुटे थे एक करोड़ लोग 

ईरान के साथ पाकिस्‍तानी जनता 

हालांकि पाकिस्तान की जनता का बड़ा वर्ग इस पूरे मामले में खुलकर ईरान के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है और अमेरिका को लेकर के लोगों में काफी गुस्‍सा है. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है. कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें ईरान के समर्थन और अमेरिका‑इजरायल की नीतियों के विरोध में नारे लगाए गए. इसी गुस्से का सबसे हिंसक रूप कराची में देखने को मिला, जहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हालात बेकाबू हो गए. 

ये भी पढ़ें: ईरान‑इजरायल तनाव का असर, महाराष्ट्र से राजस्थान तक सैंकड़ों लोग खाड़ी देशों में अटके

Photo Credit: PTI

सत्ता से अलग महसूस कर रहा आम पाकिस्‍तानी

कराची में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर झड़पें हुईं, जिनमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई. यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि पाकिस्तान के भीतर जनता की भावनाएं किस कदर उफान पर हैं और सरकार के संतुलित रुख से एक बड़ा तबका खुद को इससे अलग महसूस करता है. 

अमेरिका से बेहतर रिश्‍ते चाहता है पाकिस्‍तान   

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की यह दोहरी स्थिति नई नहीं है. एक तरफ सेना प्रमुख असीम मुनीर और सत्ता प्रतिष्ठान अमेरिका के साथ रणनीतिक रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ आम जनता और धार्मिक‑राजनीतिक समूह ईरान के प्रति सहानुभूति रखते हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान की नीति ना इधर, ना उधर जैसी दिखाई दे रही है, कूटनीति में संतुलन की कोशिश है, लेकिन जमीन पर असंतोष पनप रहा है. 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Khamenei | Israel Iran War | ऐसे खात्मा हुआ सुप्रीम लीडर खामेनेई का! | War News | US
Topics mentioned in this article