- पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अमेरिका 1.3 बिलियन डॉलर के तांबे और सोने के माइनिंग प्रोजेक्ट में निवेश करेगा
- रेको दिक प्रोजेक्ट कनाडा की बैरिक माइनिंग और पाकिस्तान सरकार की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है
- इस प्रोजेक्ट में अमेरिका अपने क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए आर्थिक सहयोग बढ़ा रहा है
पाकिस्तान के जिस बलूचिस्तान में लोगों ने आजादी की जंग छेड़ रखी है, जहां के लोग अपने संसाधनों-खनिजों के दोहने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, वहीं पर अमेरिका माइनिंग के लिए 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश करने जा रहा है. पाकिस्तान ने अपने सबसे संवेदनशील माने जाने वाले बलूचिस्तान प्रांत में तांबे और सोने के माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका से लगभग 1.3 बिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता हासिल की है. बलूचिस्तान को दुनिया के सबसे बड़े अविकसित खनिज भंडार में से एक माना जाता है और अब वहां माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए पाक सरकार को एक बड़ा विदेशी निवेश मिल गया है.
इस प्रोजेक्ट का नाम रेको दिक प्रोजेक्ट है. यह पाकिस्तान-ईरान सीमा के पास स्थित और उग्रवाद प्रभावित बलूचिस्तान में कुल 7 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट है. इसके तहत 2028 के अंत तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है.
क्या है रेको दिक प्रोजेक्ट?
रेको दिक प्रोजेक्ट को कनाडा की माइनर बैरिक माइनिंग कॉर्प और पाकिस्तान के साझेदारी में डेवलप किया जा रहा है. अमेरिका चाहता है कि वह पाकिस्तान में महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) के सप्लाई चेन को सुरक्षित करे और इसके लिए वह पाकिस्तान के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है. रेको दिक प्रोजेक्ट अमेरिका के इसी व्यापक प्रयास का एक हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट में अमेरिकी निवेश उसके निर्यात-आयात बैंक (EXIM) के माध्यम से किया जाएगा.
पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है रेको दिक प्रोजेक्ट?
रेको दिक प्रोजेक्ट पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है. इस्लामाबाद में बैठी सरकार अपनी खनिज रणनीति को मजबूत करने के लिए इस माइनिंग प्रोजेक्ट पर भरोसा कर रही है जबकि कनाडा की माइनिंग कंपनी (बैरिक) अपनी सबसे बड़ी दीर्घकालिक परियोजनाओं में से एक को आगे बढ़ा रही है. शहबाज शरीफ सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे देश के खनन क्षेत्र और आर्थिक सुधारों में विश्वास मत बताया. इस्लामाबाद को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अपने जीवनकाल में अरबों डॉलर का राजस्व अर्जित करेगी और नकदी संकट से जूझ रहे देश में विकास में मदद करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी.
क्रिटिकल मिनरल्स पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. चीन से इसकी सबसे अधिक सप्लाई होती है. ऐसे में अमेरिका की कोशिश है कि इसके सप्लाई चेन में विविधता लाई जाए. इस वजह से इस प्रोजेक्ट में अमेरिका का निवेश भू-राजनीतिक महत्व भी रखता है.
बलूच बागियों के निशाने पर माइनिंग प्रोजेक्ट
बलूचिस्तान में अलगाववादियों और जिहादियों द्वारा लगातार हमले होते रहते हैं, जिससे खदान के लिए सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन जाती है. इस प्रोजेक्ट को विदेशों में प्रोसेसिंग के लिए कराची तक तांबे को पहुंचाना होगा और उसके लिए रेलवे लाइन को भी अपग्रेड करना होगा. हालांकि ग्राउंड पर सच्चाई यह है कि बलूच लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान में लगातार ट्रेनों को निशाना बनाया है.













