Pakistan Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच फिर से जंग शुरू हो गई है. दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात लड़ाई तेज हो गई. दोनों देशों ने कहा कि दूसरे पक्ष को भारी नुकसान हुआ है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका देश अपने पड़ोसी के साथ “खुली जंग” में है. ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों देशों की सैन्य ताकत कितनी है. यह जानने के लिए हम लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के आंकड़ों को आपके सामने रखते हैं और बताते हैं कि सैन्य ताकत और हथियारों के मामले में पाकिस्तान, अफगानिस्तान से कितना आगे है.
सेना
पाकिस्तान की रक्षा सेनाओं में कुल 6,60,000 सक्रिय सैनिक हैं. इनमें. 5,60,000 थल सेना में हैं. 70,000 वायुसेना में और 30,000 नौसेना में हैं. दूसरी तरफ अफगान तालिबान की सेना छोटी है. उसके पास लगभग 1,72,000 सक्रिय सैनिक हैं. हालांकि, उसने अपनी सेना को बढ़ाकर 2,00,000 करने की योजना घोषित की है.
वायुसेना
पाकिस्तान के पास 465 लड़ाकू विमान हैं और 260 से ज्यादा हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें बहुउद्देश्यीय, हमला करने वाले और सैनिक ले जाने वाले हेलीकॉप्टर शामिल हैं. अफगानिस्तान के पास कोई लड़ाकू जेट नहीं है और उसकी कोई मजबूत वायुसेना नहीं है. उसके पास कम से कम 6 विमान हैं, जिनमें से कुछ सोवियत काल के हैं, और 23 हेलीकॉप्टर हैं. लेकिन यह साफ नहीं है कि इनमें से कितने उड़ान भरने की हालत में हैं.
लड़ाकू वाहन और तोपखाना
पाकिस्तान के पास 6,000 से ज्यादा बख्तरबंद लड़ाकू वाहन हैं और 4,600 से अधिक तोपें हैं. अफगान सेना के पास भी बख्तरबंद वाहन हैं, जिनमें सोवियत काल के मुख्य युद्धक टैंक, सैनिक ले जाने वाले बख्तरबंद वाहन और पानी के अंदर चलने वाले वाहन शामिल हैं, लेकिन उनकी सही संख्या पता नहीं है. उनके पास कम से कम तीन अलग-अलग प्रकार की तोपें हैं, लेकिन उनकी सटीक संख्या भी ज्ञात नहीं है.
परमाणु हथियार
पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है और उसके पास लगभग 170 परमाणु वारहेड (लोडेड हथियार) हैं. अफगानिस्तान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं है.
अगर ओवरऑल बात करें तो पाकिस्तान की सेना में लगातार भर्ती और सैनिकों को सर्विस में बनाए रखने की व्यवस्था है. उसे अपने मुख्य रक्षा साझेदार चीन से सैन्य उपकरण मिलते हैं. इस्लामाबाद अपने परमाणु सैन्य कार्यक्रम में लगातार निवेश कर रहा है और अपनी नौसेना व वायुसेना को आधुनिक बना रहा है. दूसरी तरफ, अफगान तालिबान की सैन्य क्षमता कम होती जा रही है. 2021 में जब उसने सत्ता संभाली, तब उसने विदेशी हथियारों पर कब्जा किया था, लेकिन अब उन हथियारों को इस्तेमाल करने की उसकी क्षमता घट रही है. तालिबान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता न मिलने से उसकी सेना के आधुनिकीकरण पर भी बुरा असर पड़ा है.














