पाकिस्तान-अफगानिस्तान की लड़ाई में चीन बना 'सरपंच', सीजफायर कराने के लिए बना मध्यस्थ

पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने चीन की मध्यस्थता में उरुमकी में सीमा विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत की।

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बीते महीने काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए पाकिस्तानी हमले में 400 से ज्यादा लोग मारे गए थे.
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  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चीन की मध्यस्थता में उरुमकी शहर में सीमा विवाद को लेकर गोपनीय वार्ता हुई
  • बातचीत का उद्देश्य सीमा पर गोलाबारी रोकना और टिकाऊ युद्धविराम पर सहमति बनाना बताया जा रहा है
  • वार्ता के दौरान अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर मोर्टार दागने का आरोप लगाया, जिसमें दो नागरिक मरे और छह घायल हुए
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान हाल ही हुए सैन्य टकराव के बाद एक बार फिर बातचीत की मेज पर आए हैं. इस बातचीत में चीन मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. उत्तरी चीन के उरुमकी शहर में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच पहले दौर की गोपनीय वार्ता संपन्न हुई है. इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य सीमा पर जारी गोलाबारी को रोकना और एक टिकाऊ युद्धविराम पर सहमति बनाना है.  हफ्तों से जारी भारी सैन्य झड़पों और हवाई हमलों के बाद इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है. पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, यह वार्ता कई दिनों तक चल सकती है और इसे एक लंबी शांति प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

हैरानी की बात यह है कि जब उरुमकी में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधि शांति वार्ता कर रहे थे, ठीक उसी वक्त सीमा पर तनाव फिर भड़क उठा. अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि बुधवार देर रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में मोर्टार दागे. इस गोलाबारी में दो आम नागरिकों की जान चली गई और चार बच्चों समेत छह लोग घायल हुए हैं.

हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. दूसरी ओर चीन ने भी फिलहाल इस पूरी बातचीत को लेकर चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह बैठक चीन के विशेष दूत यू शियाओयोंग के प्रयासों का ही नतीजा है.

पाकिस्तान क्या कह रहा है?

समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान की ओर से इस बैठक में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय दल पहुंचा है. इसमें विदेश मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा रक्षा मंत्रालय, आंतरिक मंत्रालय और देश की खुफिया एजेंसी के प्रतिनिधि शामिल हैं.

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पाकिस्तान की ओर से भी वरिष्ठ अधिकारी चर्चा में हिस्सा ले रहे हैं. पाकिस्तान के पूर्व विशेष दूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि अगर कोई समझौता होता भी है, तो सबसे बड़ी चुनौती 'वेरिफिकेशन मैकेनिज्म' यानी सत्यापन तंत्र की होगी.

पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान अपने यहां 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं. वहीं, काबुल इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है. दुर्रानी ने कहा, "जब तक यह सुनिश्चित नहीं होता कि अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं होगा, तब तक कोई भी समझौता मुमकिन नहीं है."

अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया था तनाव

इस साल फरवरी से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव उस स्तर पर पहुंच गया है। ऐसा तनाव दशकों में नहीं देखा गया है. पाकिस्तान ने खुले तौर पर अफगानिस्तान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने काबुल समेत कई अफगान शहरों में हवाई हमले किए. बीते महीने काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए पाकिस्तानी हमले में 400 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

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हालांकि, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने केवल आतंकी ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है.

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