- अमेरिकी फाइटर जेट को ईरान ने मार गिराया, पायलट ने खुद को इजेक्ट कर दिया और बाद में बचाया गया
- इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी पायलट की रेस्क्यू पर ट्रंप को बधाई दी और अपने भाई की शहादत याद की
- ऑपरेशन थंडरबोल्ट 1976 में इजरायल के कमांडो ने युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर आतंकियों से बंधकों को बचाया था
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी फाइटर जेट को ईरान ने मार गिराया. इस विमान के पायलट ने खुद को इजेक्ट कर लिया. करीब 48 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद अमेरिका ने अपने पायलट को ईरान की सीमा में घुसकर रेस्क्यू कर लिया. इस ऑपरेशन के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को बधाई दी. इस दौरान उन्होंने अपने भाई की शहादत का भी जिक्र किया. नेतन्याहू के भाई एक इजरायली रेस्क्यू ऑपरेशन में शहीद हुए थे. इजरायल के इतिहास की वो रात, जिसने पूरी दुनिया को सेना की ताकत का नया चेहरा दिखाया. जब इजरायल के जांबाज कमांडो अपने नागरिकों को बचाने के लिए 4,000 किलोमीटर दूर युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे पर काल बनकर उतरे थे. यह सिर्फ एक 'रेस्क्यू मिशन' नहीं था, बल्कि एक ऐसी जंग थी जिसमें बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनातन शहीद हुए थे. क्या था उस रात का वो खौफनाक मंजर और कैसे एक कमांडर ने इजरायल का सैन्य इतिहास बदल दिया? आइए जानते हैं 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' की पूरी कहानी.
क्या था ऑपरेशन थंडरबोल्ट?
इजरायली सैन्य इतिहास में इस मिशन को 'ऑपरेशन एंटेबे' और 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' के नाम से जाना जाता है. यह बात है 27 जून 1976 की, जब पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन के आतंकियों ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव से पेरिस जा रहे एक यात्री विमान को हाई जैक कर लिया. आतंकी इस विमान को युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर ले गए और लैंडिंग की. आतंकियों ने विमान से गैर यहूदियों को जाने दिया और 100 से ज्यादा यहूदी और इजरायली यात्रियों को बंधक बना लिया. इसके बदले आतंकवादियों ने इजरायल और अन्य देशों की जेलों में बंद 54 कैदियों की रिहाई की मांग की.
इजरायल की लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस विमान, जो यात्रियों को बचाकर लाया
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इजरायल ने चलाया ऑपरेशन थंडरबोल्ट
इजरायली सरकार ने आतंकियों की मांग नहीं मानी और अपने नागरिकों को बचाने के लिए ऐसा फैसला लिया, जिसने इजरायली सैन्य ताकत की धमक पूरी दुनिया को दिखा दी. इजरायल ने अपनी सेना की सबसे खास यूनिट सरेत मतकल को रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने की जिम्मेदारी दी. 4 जुलाई 1976 को इजरायली कमांडो ने लगभग 4 हजार किलोमीटर दूर युगांडा जाकर एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया. बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनातन नेतन्याहू इस स्पेशल यूनिट के कमांडर थे. योनातन ही जमीन से हमले को लीड कर रहे थे.
इजरायल ने बनाया खास प्लान
इस मिशन को अंजाम देने के लिए इजरायली कमांडो ने युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन को चकमा देने के लिए एक नायाब योजना बनाई थी. उन्होंने अपनी गाड़ियों के काफिले को ठीक वैसा ही रूप दिया जैसा अमीन का होता था. इजरायली विमान से सबसे पहले एक काली मर्सिडीज कार और दो लैंड रोवर गाड़ियां बाहर निकलीं. युगांडा के सैनिकों को लगा कि खुद राष्ट्रपति ईदी अमीन एयरपोर्ट का दौरा करने आए हैं. इसी भ्रम के चलते इजरायली कमांडो काफी करीब तक पहुंचने में कामयाब रहे.
कैसे शहीद हुए योनातन नेतन्याहू?
बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनातन इस पूरे जमीनी हमले के कमांडर थे. वो टर्मिनल के मुख्य द्वार की ओर अपनी टीम को लीड कर रहे थे. जैसे ही इजरायली कमांडो टर्मिनल के पास पहुंचे, एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर से युगांडा के सैनिकों ने गोलीबारी शुरू कर दी. एक गोली सीधे योनातन के सीने में लगी. वे टर्मिनल के बाहर ही गिर पड़े. मिशन की मेडिकल यूनिट ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही वे शहीद हो गए.
एयरपोर्ट पर आतंकियों को कर दिया ढेर
इजरायली कमांडो तेजी से टर्मिनल के भीतर घुसे. यह देखकर आतंकी घबरा गए. कमांडो ने हिब्रू और अंग्रेजी में चिल्लाकर आतंकियों से जमीन पर लेट जाने को कहा. दोनों तरफ से जमकर गोलीबारी भी हुई. करीब 20-30 मिनट चली इस भीषण गोलीवारी में इजरायली कमांडो ने सभी 7 आतंकियों को मार गिराया. इस दौरान एयरपोर्ट की सिक्योरिटी में तैनात युगांडा के कई सैनिक भी मारे गए. आतंकियों के खात्मे के बाद इजरायली कमांडो ने युगांडा की वायुसेना के कुछ लड़ाकू विमानों को भी जमीन पर उड़ा दिया. ताकि वापसी के दौरान युगांडा की एयरफोर्स उनका पीछा ना कर पाए. इजरायली सेना 102 बंधकों को सुरक्षित बचाने में सफल रही, जबकि 3 बंधकों और 1 अन्य यात्री की मौत हुई. इस मिशन की सफलता ने इजरायल के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया.
अपने नागरिकों को वापस लेकर आया इजरायल
Photo Credit: times of israel
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इजरायल ने मिशन का नाम रखा 'ऑपरेशन योनातन'
इस साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन में योनातन नेतन्याहू की बहादुरी और बलिदान को देखते हुए इजरायल सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसका नाम ऑपरेशन योनातन रख दिया. वहीं अपने बड़े भाई की मौत ने बेंजामिन नेतन्याहू को झकझोर कर रख दिया. वो खुलकर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने लगे और इजरायली की राजनीति में भी काफी सक्रिय हो गए. बाद में बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री तक बन गए.
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