अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डर से ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दी कि कहीं वो परमाणु हथियार न बना ले. लेकिन उनके लिए बुरी खबर नॉर्थ कोरिया से आई है जो पहले से ही परमाणु हथियार रखने वाले देश है. संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने बुधवार, 15 अप्रैल को कहा कि नॉर्थ कोरिया की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता में “बहुत तेज बढ़ोतरी” हो रही है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी साउथ कोरिया के दौरे पर पहुंचे हैं.
साउथ कोरिया की खुफिया एजेंसी के अनुसार, दुनिया से कटा हुआ नॉर्थ कोरिया यूरेनियम को शुद्ध (एनरिच) करने के कई केंद्र चला रहा है, जो परमाणु हथियार बनाने का एक अहम कदम है. इनमें योंगब्योन परमाणु केंद्र भी शामिल है, जिसे नॉर्थ कोरिया ने बंद करने का दावा किया था, लेकिन 2021 में इसे फिर से चालू कर दिया गया.
'तबाही वाली फैक्ट्री' में क्या हो रहा?
अब IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने सियोल में पत्रकारों से कहा कि हमारी नियमित जांच में हमने देखा है कि योंगब्योन रिएक्टर के काम में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ग्रॉसी ने कहा कि एजेंसी ने योंगब्योन के रीप्रोसेसिंग यूनिट और लाइट-वॉटर रिएक्टर में भी काम बढ़ता हुआ देखा है, साथ ही दूसरे केंद्र भी चालू हो रहे हैं. उन्होंने कहा, “यह सब दिखाता है कि नॉर्थ कोरिया की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता में बहुत बड़ी बढ़ोतरी हो रही है, जो अभी कुछ दर्जन हथियारों तक पहुंच चुकी है.”
बता दें कि नॉर्थ कोरिया ने 2006 में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था. इसके बाद उसके प्रतिबंधित हथियार कार्यक्रमों के कारण उस पर संयुक्त राष्ट्र के कई प्रतिबंध लगे हुए हैं. नॉर्थ कोरिया ने साफ कहा है कि वह अपने परमाणु हथियार कभी नहीं छोड़ेगा, और उसने 2009 में IAEA के इंस्पेक्टर्स को अपने यहां आने से रोक दिया था.
नई फैक्ट्री भी लगा रहा नॉर्थ कोरिया
ग्रॉसी ने कहा कि एजेंसी ने “योंगब्योन जैसे एक नए केंद्र का निर्माण” भी देखा है. उन्होंने कहा कि बिना वहां जाकर देखे उत्पादन में बढ़ोतरी का सही अनुमान लगाना आसान नहीं है. लेकिन उन्होंने कहा, “इस केंद्र की बाहरी गतिविधियों को देखकर हम मानते हैं कि नॉर्थ कोरिया की यूरेनियम समृद्ध करने की क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस नॉर्थ कोरिया के परमाणु कार्यक्रम में मदद कर रहा है, तो ग्रॉसी ने कहा कि IAEA को ऐसा कोई खास सबूत नहीं मिला है. गौरतलब है कि नॉर्थ कोरिया ने रूस के यूक्रेन पर हमले में मदद के लिए सैनिक और तोप के गोले भेजे हैं, और माना जाता है कि इसके बदले उसे रूस से सैन्य तकनीक मिल रही है.














