होगा बदलाव या पुराने चेहरे पर ही जनता जताएगी भरोसा, नेपाल का अगला प्रधानमंत्री कौन?

युवाओं के लिए बदलाव का मतलब केवल किसी पार्टी या नेता का परिवर्तन नहीं है. वे उस पूरी राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जो उन्हें शिक्षा और रोजगार के लिए देश छोड़कर विदेश जाने को मजबूर करती है

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
नेपाल में नए पीएम के लिए किया मतदान
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • नेपाल में पिछले साल हुए Gen Z आंदोलन के बाद युवा मतदाता मध्यावधि चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं
  • नेपाली कांग्रेस ने युवाओं की मांगों को देखते हुए नेतृत्व में बदलाव कर गगन थापा को प्रमुख चेहरा बनाया है
  • CPN-UML ने केपी शर्मा ओली को नेतृत्व में बनाए रखा है जो युवा मतदाताओं में कुछ हद तक अलोकप्रिय हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
काठमांडू:

नेपाल में यह एक मध्यावधि चुनाव है, जो पिछले वर्ष हुए Gen Z आंदोलन के बाद की राजनीतिक परिस्थिति का परिणाम माना जा रहा है. इस चुनाव में युवा वर्ग सबसे महत्वपूर्ण और केंद्र में रहने वाला मतदाता समूह बन गया है.इस आंदोलन से जुड़े युवाओं ने भ्रष्टाचार विरोध, भाई-भतीजावाद और पक्षपात का अंत, रोजगार के अवसर और “परिवर्तन” जैसे मुद्दों को प्रमुख एजेंडा बनाया है. इसलिए  नेपाल के अधिकांश युवा बदलाव चाहते हैं.

हालांकि, युवाओं के लिए बदलाव का मतलब केवल किसी पार्टी या नेता का परिवर्तन नहीं है. वे उस पूरी राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जो उन्हें शिक्षा और रोजगार के लिए देश छोड़कर विदेश जाने को मजबूर करती है.इसी दबाव को देखते हुए नेपाली कांग्रेस ने विशेष अधिवेशन बुलाकर अपनी नेतृत्व संरचना में बदलाव किया और पुराने तथा अलोकप्रिय चेहरे शेरबहादुर देउबा की जगह गगन थापा को आगे लाने का फैसला किया.

दूसरी ओर, CPN-UML ने इस बदलते राजनीतिक माहौल के बावजूद केपी शर्मा ओली को ही नेतृत्व में बनाए रखा, जिसके कारण पार्टी युवा मतदाताओं के बीच कुछ हद तक अलोकप्रिय होती दिखाई दे रही है.इस पूरे राजनीतिक परिदृश्य में बालेन शाह युवाओं के लिए एक तरह से पोस्टर बॉय बनकर उभरे हैं. राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) ने भी उनके चेहरे और लोकप्रियता को अपने अभियान का केंद्र बनाया है और “अबकी बार बालेन सरकार” जैसे नारों के साथ इसे जोर-शोर से आगे बढ़ाया है.

बालेन को अक्सर “मधेश का छौरा (मधेश का बेटा)” कहकर भी प्रस्तुत किया जा रहा है, जो नेपाल के अगले प्रधानमंत्री के रूप में एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर सकता है.युवा मतदाता इन कथाओं और नारों को काफी गंभीरता से ले रहे हैं. फिलहाल युवाओं के बीच गगन थापा और बालेन शाह दोनों ही लोकप्रिय हैं, हालांकि लोकप्रियता के स्तर में कुछ अंतर जरूर दिखाई देता है.इस चुनाव में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) के अच्छे प्रदर्शन की संभावना काफ़ी अधिक मानी जा रही है, और उनके अभियान का सबसे बड़ा चेहरा बालेन शाह हैं. नेपाल के युवा वर्ग के बीच जिस तरह से वे आकर्षण पैदा कर रहे हैं, वही उनकी राजनीति के उभार का सबसे बड़ा कारण बन गया है. इस समय नेपाल के किसी भी राजनीतिक नेता की तुलना में उनकी लोकप्रियता निस्संदेह काफ़ी अधिक दिखाई देती है.

बालेन केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों और समाज के लगभग हर वर्ग के लोगों को अपनी व्यक्तित्व और शैली से आकर्षित करते हैं. हालाँकि यह अभी देखना बाकी है कि यह लोकप्रियता वास्तविक वोटों में कितनी प्रभावी रूप से बदल पाती है.फिलहाल इतना साफ़ दिख रहा है कि बालेन को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में आगे रखकर RSP इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है.

यह भी उम्मीद की जा रही है कि प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) वोटों में भी पार्टी को काफ़ी अच्छा समर्थन मिल सकता है, जिसका बड़ा कारण बालेन की लोकप्रियता ही है.अगर परिस्थितियाँ इसी दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन सकते हैं.मौजूदा हालात को देखते हुए उनके अगले और सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में उभरने की संभावना लगभग 50–50 मानी जा सकती है.जहाँ तक प्रधानमंत्री पद की दौड़ का सवाल है, केपी शर्मा ओली तीन प्रमुख घोषित दावेदारों में से एक हैं. अन्य दो दावेदार हैं बालेन्द्र शाह (बालेन), जो काठमांडू के पूर्व मेयर हैं और राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं, तथा गगन थापा, जो नेपाल की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस से आते हैं.

हालांकि, ओली के लिए रास्ता इतना आसान दिखाई नहीं देता. पिछले सितंबर में हुई Gen Z क्रांति ने उनके शासन के प्रति गहरी नाराज़गी और असंतोष पैदा किया है. आलोचकों द्वारा उन्हें उस आंदोलन के दौरान मारे गए 77 निर्दोष लोगों की मौत के लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत होता है कि असली राजनीतिक मुकाबला गगन थापा और बालेन्द्र शाह के बीच बनता जा रहा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: नेपाल चुनाव: क्या GenZ के सपने पूरे होंगे? उम्मीदवारों और पार्टियों के घोषणापत्र कर रहे कंफ्यूज

Featured Video Of The Day
IND vs ENG, T20 World 2026: इंग्लैंड ने जीता टॉस, भारत पहले करेगा बैटिंग | Breaking News
Topics mentioned in this article