नेपाल चुनाव में 74 बनाम 35 की जंग! PM कुर्सी की लड़ाई में ओली को मिलेगी बालेन शाह से टक्कर

Nepal Election 2026: नेपाल चुनाव में इस बार केपी ओली को युवा और लोकप्रिय नेता बालेन शाह का सामना करना पड़ेगा. जहां बालेन नेपाल की उभरती युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं ओली को रूढ़िवादी और कठोर राजनीतिक धारा का चेहरा माना जाता है.

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Nepal Election 2026: केपी ओली को टक्कर देने को तैयार बालेन शाह
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  • नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव के लिए तीन प्रमुख दलों ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं
  • कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया है
  • इंजीनियर और रैपर से नेता बने बालेन्द्र शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे
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काठमांडू, नेपाल:

नेपाल में कड़ाके की ठंड के बावजूद चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है. पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव के लिए तीन राजनीतिक दलों ने प्रधानमंत्री पद के वास्ते अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. देश के सबसे बड़े वामपंथी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) ने पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (74) को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार आधिकारिक रूप से घोषित किया है. वहीं, नेपाल के सबसे पुराने दल नेपाली कांग्रेस और नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 50 वर्ष से कम उम्र के उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं.

नेपाली कांग्रेस (एनसी) के 49 वर्षीय नेता गगन थापा को पिछले सप्ताह पार्टी का अध्यक्ष चुना गया. उसके तुरंत बाद पार्टी के उपाध्यक्ष बिश्व प्रकाश शर्मा ने घोषणा की कि गगन थापा ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता चरण प्रसाई ने कहा, ‘‘नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा के अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित होने से मौजूदा चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है. थापा ‘जेन जेड' युवाओं की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं.''

हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले नेपाली कांग्रेस के एक अन्य धड़े ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें गगन थापा के नेतृत्व वाले धड़े को असली एनसी के रूप में मान्यता दी गई है.

ओली को बालेन्द्र शाह देंगे कड़ी टक्कर 

इस बार के आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार में बालेन्द्र शाह का नाम भी चर्चा में है. इंजीनियर और रैपर से नेता बने 35 वर्षीय बालेन्द्र शाह को 2022 में काठमांडू महानगर के मेयर पद पर भारी बहुमत से चुना गया था. ‘बालेन' के नाम से मशहूर शाह अपने सुधार कार्यक्रमों और काठमांडू के सौंदर्यीकरण के चलते न केवल राजधानी बल्कि पूरे देश में युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.

निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मेयर का चुनाव जीतने वाले बालेन अब अपनी टीम के साथ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी में शामिल हो गए हैं और आम चुनाव लड़ने जा रहे हैं. उन्होंने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया ताकि 20 जनवरी को संसदीय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकें, जो चुनाव आयोग द्वारा तय तारीख है.

सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष ओली को अब बालेन से चुनौती मिलेगी, जो उम्र में उनसे आधे हैं. दोनों ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जिससे कोशी प्रदेश का यह पूर्वी जिला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

ओली पिछले तीन दशकों में झापा जिले से छह बार संसद के लिए चुने जा चुके हैं, केवल 2008 के पहले संविधान सभा चुनाव को छोड़कर. 2022 के पिछले आम चुनाव में उन्होंने नेपाली कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 28 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया था. इस बार ओली को युवा और लोकप्रिय नेता बालेन का सामना करना पड़ेगा. जहां बालेन नेपाल की उभरती युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं ओली को रूढ़िवादी और कठोर राजनीतिक धारा का चेहरा माना जाता है.

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जेन जेड युवाओं ने सितंबर में हुए अपने आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और उस समय के गृह मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के रमेश लेखक को जिम्मेदार ठहराया है. इस आंदोलन में 77 लोगों की मौत हो गई थी.

चार बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले चुके ओली को अपने पिछले कार्यकाल में जेन जेड के विरोध प्रदर्शन के दूसरे ही दिन सेना के हेलीकॉप्टर से भागना पड़ा था, जब सैकड़ों गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के बालुवाटार स्थित प्रधानमंत्री आवास में तोड़फोड़ की थी.

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नेपाल समाचारपत्र की वरिष्ठ पत्रकार सरस्वती कर्माचार्य ने कहा, ‘‘पार्टी के भीतर अपने विरोधियों को रणनीतिक रूप से किनारे कर खुद को निर्विवाद नेता बनाने वाले ओली के लिए इस बार का संसदीय चुनाव न केवल कड़ी चुनौती होगा, बल्कि पूर्व मेयर बालेन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उनका पांच दशक से अधिक लंबा राजनीतिक करियर भी खतरे में पड़ सकता है.''

इस परिदृश्य में अन्य उभरते उम्मीदवारों में उज्यालो नेपाल पार्टी के अध्यक्ष कुलमान घिसिंग और धरान उपमहानगर के मेयर हरका सम्पांग भी शामिल हैं. घिसिंग ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण का प्रमुख रहते हुए देश में 16 घंटे की ‘लोडशेडिंग' (बिजली कटौती) खत्म की थी. घिसिंग और सम्पांग दोनों ही नेपाल के विभिन्न जातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं और जेन जेड के अलग-अलग समूहों के बीच लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरे हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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