करीब एक महीने से जंग की मार झेल रहे मिडिल ईस्ट के देशों पर एक नया असामान्य खतरा मंडरा रहा है. फारस की खाड़ी के ऊपर एक शक्तिशाली और खतरनाक तूफान मंडरा रहा है. ये तूफान इतना भीषण है कि यूएई, ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में तबाही मचा सकता है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सामान्य मौसमी बदलाव नहीं बल्कि ऐसा कट-ऑफ लो प्रेशर सिस्टम है जो खाड़ी के रेगिस्तानी इलाकों में भीषण बारिश और बवंडर पैदा कर सकता है.
2-3 दिन में हो सकती है पूरे साल की बारिश
इस तूफान की डराने वाली बात ये भी है कि अगले तीन दिनों में कुछ इलाकों में 100 मिमी से लेकर 500 मिमी तक बारिश हो सकती है. ये उन देशों के लिए चिंताजनक बात हो सकती है, जहां पूरे साल में महज 100 मिमी के आसपास ही बारिश होती है. अनुमान है कि गुरुवार और शुक्रवार को यह सिस्टम अपने चरम पर होगा. इसकी वजह से अचानक बाढ़ जैसा खतरा पैदा हो सकता है. सऊदी अरब और यमन के कुछ हिस्सों में हबूब (धूल भरा तूफान) और डेजर्ट टॉरनेडो यानी रेगिस्तानी बवंडर उठने की भी आशंका जताई गई है.
दुबई में 2024 जैसी बाढ़ का खतरा
इस तूफान के बीच नजरें एक बार फिर से दुबई पर टिकी हैं. दो साल पहले अप्रैल 2024 में दुबई में 75 साल की सबसे भीषण बारिश हुई थी. 15 से 17 अप्रैल के बीच ही दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 6.45 इंच बारिश हो गई थी. रनवे पानी में डूब गए थे. इसकी वजह से 1200 से ज्यादा फ्लाइटें रद्द करनी पड़ी थीं. दुबई में आमतौर पर साल में औसत 4 इंच बारिश होती है. इस बार तूफान की वजह से इस हफ्ते 3 से 6 इंच तक बारिश होने की संभावना है. दूसरे शब्दों में कहें तो साल भर में जितनी बारिश होती है, उतनी महज एक या दो दिन में हो सकती है.
मार्च 2019 में भी ईरान, इराक और सीरिया में भीषण बारिश हुई थी. इसकी वजह से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था. 2022 में सऊदी अरब के जेद्दाह में भयंकर बाढ़ आ गई थी. महज 6 घंटे में ही 179 मिमी बारिश हो गई थी. 2020 में तूफान ने इजिप्ट से लेकर ईरान तक 9 देशों को प्रभावित किया था.
यूएई के फुजैरा में बुधवार को फ्लैश फ्लड में कार बहती नजर आई.
UAE, सऊदी अरब पर तूफान का साया
सऊदी अरब के दक्षिण पश्चिमी इलाकों में भी तूफान का भारी असर दिख सकता है. मक्का, अल बाहा और जाजन प्रांतों के अलावा उत्तर पश्चिम में तमाहा और यमन के अजल में खतरा बताया गया है. इसी तरह का खतरा अबू धाबी, शारजाह जैसे शहरों के लिए भी जताया जा रहा है. शहरों में एक बड़ी चुनौती पानी की निकासी की हो सकती है क्योंकि रेगिस्तानी इलाकों में शहरों का इन्फ्रास्ट्रक्चर इतनी ज्यादा बारिश झेलने के लिए नहीं बना है.
हवाई अड्डे अलर्ट पर, तैयारियां तेज
इस प्राकृतिक आपदा का असर हवाई यात्रा पर पड़ने की भी आशंका है. इसे देखते हुए हवाई अड्डे हाई अलर्ट पर हैं. दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अबू धाबी जैसे बिजी हवाई अड्डों पर जरूरत पड़ने पर उड़ानें डायवर्ट करने और रद्द करने की तैयारी कर ली गई है. आशंका जताई जा रही है कि भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण रनवे पर ऑपरेशन बंद करने पड़ सकते हैं. पिछली बार से सबक लेते हुए एयरलाइंस इस बार पहले से ही यात्रियों को अलर्ट करने की तैयारी कर रही हैं .
युद्ध स्तर पर तैयारियां, इमरजेंसी सेवा अलर्ट पर
इस प्राकृतिक आपदा को देखते हुए खाड़ी देशों की सरकारें युद्ध स्तर पर तैयारी कर रही हैं. यूएई, ओमान और सऊदी अरब में इमरजेंसी सेवाओं को स्टैंडबाई पर रखा गया है. निचले इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है. दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की तैयारी है. अबू धाबी में तो कई सड़कों पर वाहनों की रफ्तार घटा दी गई है. फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया गया है. लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है.













