- मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष में अमेरिका ने करीब 3500 सैनिक वॉरशिप से तैनात किए हैं, जो जमीनी हमला कर सकते हैं
- अमेरिका की 82nd एयरबोर्न डिवीजन को भी मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है, जो पैराशूट से लड़ाकू अभियान में सक्षम है
- ईरान ने पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं पर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है और जमीनी हमले का जवाब देने को तैयार है
मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब बेहद खतरनाक रूप ले चुकी है. इस जंग को शुरू हुए महीनेभर से ज्यादा वक्त बीत चुका है. ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान से बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों ओर से हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे. मिडिल ईस्ट में छिड़ी यह जंग पूरी दुनिया के लिए घातक होती जा रही है. तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. इस बीच ईरानी संसद के स्पीकर ने आरोप लगाया है कि कूटनीति की बातें करने के बावजूद अमेरिका जमीनी हमले की साजिश रच रहा है. करीब 3500 अमेरिकी सैनिक वॉर शिप से मिडिल ईस्ट पहुंचे हैं. रिपोर्ट्स यह भी आई कि अमेरिका अपने सबसे घातक 82nd एयरबोर्न डिवीजन को मिडिल ईस्ट में तैनात करने की तैयारी कर रहा है. वहीं दूसरी ओर ईरान भी जमीनी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है. ईरान ने भी जमीनी स्तर पर अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाया है.
अमेरिका ने जमीनी स्तर पर बढ़ाई तैनाती
इस जंग में अमेरिका शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपना रहा है. पहले उसने इजरायल के साथ मिलकर मिसाइल और ड्रोन से ईरान को निशाना बनाया. लेकिन ईरान के जोरदार पलटवार के बाद अब अमेरिका जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया है कि उनके वॉर शिप से करीब 3500 मरीन और नाविक मिडिल ईस्ट पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि ये सैनिक अमेरिकी नेवी के एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप का हिस्सा हैं, जो समुद्र से जमीन पर हमला करने में माहिर मानी जाती है.
Iran War
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ईरान भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार
उधर ईरान को भी मालूम है कि अमेरिका और इजरायल जंग जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने कहा, 'दुश्मन खुलेआम बातचीत और डायलॉग के मैसेज भेज रहा है, लेकिन गुप्त रूप से जमीनी हमले की साजिश रच रहा है. हमारे जवान अमेरिकी सैनिकों के जमीनी आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें सबक सिखा सकें.' IRGC भी इन दिनों बड़े पैमाने पर मिलिट्री ड्रिल्स कर रहा है. IRGC की ग्राउंड फोर्सेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है. ईरान ने अपनी पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं पर बख्तरबंद वाहनों, आर्टिलरी और सैनिकों की भारी तैनाती की है.
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भारत समेत दुनिया पर क्या होगा असर
अगर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जमीनी युद्ध हुआ तो यह तो तय है कि ये बहुत लंबा खिंचेगा. यहां भी हालात 2003 के इराक युद्ध जैसे हो सकते हैं. ईरान पहले ही धमकी दे चुका है कि अगर उस पर हमला होता है को वो होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर देगा. दुनियाभर में पहले ही तेल के दाम काफी बढ़ गए हैं और कुछ देशों में एनर्जी इमरजेंसी जैसे हालात हैं. ये जमीनी जंग पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख देगी. फिलहाल दोनों ओर से संकेत यही हैं कि ये जंग कभी भी जमीनी युद्ध में बदल सकती है. दोनों पक्षों की जमीनी तैयारी प्रचंड है और अगले कुछ दिनों में स्थिति और साफ हो सकती है.
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