इजरायल-अमेरिका और ईरान का युद्ध दिन-प्रतिदिन जटिल होता जा रहा है. युद्ध का शिकार होने वालों में इजरायल और ईरान के अलावा खाड़ी के देश भी हैं.ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी के नौ देशों पर निशाना साधा है. वह इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. लेकिन अभी तक इनमें से किसी ने भी ईरान पर जवाबी कार्रवाई नहीं की है. इस बीच अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्री गुरुवार को सऊदी अरब के रियाद में जुटे. बैठक के बाज एक साझा बयान जारी किया गया. इसमें ईरान से हमले रोकने और उनके जवाबी कार्रवाई के अधिकार का जिक्र है. युद्ध शुरू होने के बाद अरब-मुस्लिम एकजुटता दिखाने का यह पहला प्रयास था. बैठक का उद्देश्य ईरान की जवाबी कार्रवाई का साझा जवाब तैयार करना था. यह तनाव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहा है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी व्यवधान पैदा कर रहा है.
साझा बयान का क्या संदेश था
बैठक के बाद जारी साझा बयान दुनिया के लिए एक संतुलित संदेश था. इसमें तनाव बढ़ाने की निंदा के साथ-साथ संप्रभुता की रक्षा और युद्ध के व्यापक होने से बचने की कोशिश नजर आई. बयान पर कतर, अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों के दस्तखत हैं. बैठक की विविधता बता रही है कि युद्ध का प्रभाव कितना व्यापक है. बैठक में शामिल हुए देश युद्ध से प्रभावित हुए हैं, चाहे वह ईरान के हमलों से हों या गिरते मलबे से पैदा हुए अप्रत्यक्ष खतरों की वजह से या ऊर्जा की आपूर्ति के संदर्भ में हो या युद्ध से विस्थापन की आशंका का हो. इस युद्ध में लेबनान को जानमाल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है. हिज़्बुल्लाह ने दो मार्च को इजरायल पर हमले शुरू कर दिए थे. इजरायल के जवाबी हमलों में लेबनान में 1001 लोग मारे गए हैं. इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी कार्रवाई भी शुरू की है. एक खास बात यह है कि इन सभी देशों की पहले ईरान के प्रति सहानुभूति थी.
यह युद्ध अब अपने चौथे हफ्ते में पहुंचने वाला है. इस युद्ध से मध्य पूर्व में अराजकता फैल गई है. रियाद में बैठक तब आयोजित की गई, जब ईरान ने बुधवार को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में कई ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया. ईरान ने ये हमले तब किए जब इजरायल ने उसके सबसे बड़े ऊर्जा स्रोत साउथ पार्स गैस फिल्ड पर हमला किया. ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी, बासिज अर्धसैनिक कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी और खुफिया प्रमुख इस्माइल खतीब की हत्या के बाद इजरायल ने ये हमले किए.
ईरान और इजरायल से संतुलन बनाने की कोशिश
रियाद में हुई बैठक की खास बात ईरान की स्पष्ट लेकिन नियंत्रित आलोचना रही. बैठक में शामिल मंत्रियों ने हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि देशों की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए, नागरिक ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके अलावा इलाके में बढ़ते तनाव को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया गया. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में ईरान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने से जोर नहीं दिया गया है. यह रुख यह बताता है कि तनाव के बाद भी कई देश ईरान से पूरी तरह संबंध नहीं तोड़ना चाहते हैं. वे उसके साथ संवाद को जरूरी मानते हैं. बैठक में इजरायल की भूमिका पर भी संयमित चर्चा हुई. उसकी कुछ आलोचना तो जरूर हुई, लेकिन मंत्रियों ने सीधे तौर पर ईरान पर इजरायली हमलों पर ज्यादा जोर नहीं दिया. उनका सारा जोर क्षेत्रीय स्थिरता पर रहा. अरब-मुस्लिम देशों का यह संतुलन दिखाता है कि ईरान के हमलों की निंदा करनी है, इजरायल के साथ तनाव नहीं बढ़ाना है और बातचीत की गुंजाइश बनाए रखनी है.बैठक का एक संदेश यह भी था कि इलाके में बढ़ता तनाव किसी के हित में नहीं है.
टीवी चैनल अल जजीरा के लाइव ट्रैकर के मुताबिक ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों में अब तक करीब 1,444 लोग मारे गए हैं और 18,551 लोग घायल हुए हैं.
कौन चला रहा है ईरान
अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के अलावा कई दूसरे प्रभावशाली नेताओं की मौत हो चुकी है. अब ऐसे में सवाल यह पैदा हो रहा है कि ईरान के सत्ता की बागडोर किसके हाथ में है. मुजतबा खामेनेई को अपने दिवंगत पिता का उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए हैं. लेकिन सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद वो सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. यह शीर्ष पद संभालने से पहले उन्होंने कभी भी कोई सरकारी पद नहीं संभाला था. उन्होंने बुधवार देर अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर लिखा था,'' बहाए गए खून के हर कतरे की एक कीमत होती है और इन शहीदों के हत्यारों को जल्द ही वह कीमत चुकानी पड़ेगी.''
इजरायल के हमले में ईरान से सुरक्षा मामलों के प्रभारी अली लारिजानी की भी मौत हो गई थी.
वहीं ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कार्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी तसनीम समाचार एजेंसी ने गुरुवार को कहा था कि ईरानी सेना ने देश में ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने वाले धोखेबाज और झूठे दुश्मन को जवाब दिया है. यहां साउथ पार्स पर इजरायली हमले का संदर्भ था. यह भी कहा गया है कि ईरान मित्र पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहता है, लेकिन अपने बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए उसने युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश किया है. ये दोनों बयान इस बात के प्रतीक है कि दुनिया का सामना एक नए ईरान से है, जिसका नेतृत्व एकदम नया है, उनकी मानसिकता नई है और ईरान युद्ध लड़ रहा है.














