- फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई के खेल सबोंग का सालाना लगभग 8 हजार करोड़ से अधिक का बाजार है
- अमेरिका से हर साल करीब 900 करोड़ रुपये के 40 से 50 हजार लड़ाकू मुर्गे फिलीपींस भेजे जाते हैं
- फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई का 'ओलंपिक' वर्ल्ड स्लैशर कप भी होता है, जहां हजारों करोड़ के दांव लगते हैं
आपने सड़क किनारे कभी मुर्गों की लड़ाई तो देखी होगी, लेकिन फिलीपींस में बाकायदा इनका फाइट कराई जाती है. लाखों लोग इन्हें देखते हैं. हजारों करोड़ रुपये का सट्टा लगता है. अमेरिका से हर साल अनुमानित 40 हजार से ज्यादा लड़ाकू मुर्गे फिलीपींस में जंग लड़ने भेजे जाते हैं. इसका सालाना करीब 900 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट कारोबार बताया जाता है. अब इस बिजनेस पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल, फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई के खेल में इस्तेमाल होने वाले अमेरिकी फाइटर मुर्गों को ले जाने से कोरियाई एयरलाइंस ने इनकार कर दिया है.
फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई का बड़ा बाजार
फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई का जबर्दस्त क्रेज है. इसे सबोंग कहा जाता है. जगह-जगह इसकी प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं. स्टेडियम और फाइट रिंग तक बने हुए हैं. हजारों लोग देखने आते हैं. खेल को खूनी बनाने के लिए मुर्गों के ऊपर चाकू बांधकर भी लड़ाया जाता है. पशु कल्याण संगठन इस पर बैन की मांग करते रहे हैं. एनिमल वेलफेयर एक्शन और सेंटर फॉर ए ह्यूमेन इकोनमी का दावा है कि अगर इसमें अमेरिकी प्रीमियम ब्रीड्स, स्पेशल दानों और दवाइयों के बाजार को भी जोड़ दिया जाए तो यह पूरा बिजनेस सालाना 1 बिलियन डॉलर (8300 करोड़ रुपये) से ज्यादा का है. \
कॉक फाइट का 'ओलंपिक'
फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई का 'ओलंपिक' भी आयोजित किया जाता है. इसका औपचारिक नाम वर्ल्ड स्लैशर कप (World Slasher Cup) है. इस साल 'मुर्गों का ओलंपिक' 26 जनवरी से 1 फरवरी के बीच मनीला में हुआ था. इसमें दुनिया भर से आए करीब 800 मुर्गों के बीच फाइट हुई. जंगी मुर्गों का सबसे बड़ा दल अमेरिका से आया था. ग्रैंड फिनाले में 46 मुर्गों के बीच 92 मैच खेले गए. इस बार की खास बात ये रही कि किसी एक मुर्गे को वर्ल्ड चैंपियन घोषित करने के बजाय 5 मुर्गों को संयुक्त चैंपियन डिक्लेयर किया गया.
अमेरिका से आते हैं हजारों फाइटर मुर्गे
फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई के लिए अमेरिका से बड़ी संख्या में फाइटर मुर्गों का आयात किया जाता है. हर साल 40 से 50 हजार लड़ाकू मुर्गे अमेरिका से वैध और अवैध तरीके से लाए जाते हैं. अमेरिकी फाइटर नस्ल के मुर्गों की भारी डिमांड रहती है. अच्छी नस्ल के मुर्गों की कीमत 2000 डॉलर (भारतीय रुपये में डेढ़ लाख से ज्यादा) तक होती है. अमेरिका से मुर्गों के निर्यात का ये कारोबार 80 से 100 मिलियन डॉलर (करीब 900 करोड़ रुपये) तक का बताया जाता है.
ऑनलाइन फाइट पर सरकार का बैन
लोग ऑनलाइन बैठकर मुर्गों पर मोटा दांव लगाने लगे. एक-एक बार में एक लाख से अधिक लोग मुर्गों पर सट्टा लगाते थे. रोज 400-500 करोड़ रुपये के दांव लगते थे. इस सट्टेबाजी में कई परिवार बर्बाद हो गए. अपराध बहुत बढ़ गए. हत्याएं होने लगीं. लोग गायब होने लगे. समस्या इतनी बेकाबू हुई कि 2022 में सरकार ने ई-सबोंग पर बैन लगा दिया. हालांकि सामने बैठकर लड़ाई देखने पर कोई रोक नहीं है.
अमेरिका से मुर्गों की तस्करी
फिलीपींस में मुर्गों की लड़ाई के लिए अमेरिका से भारी संख्या में मुर्गे लाए जाते हैं. अवैध रास्तों से बड़े पैमाने पर तस्करी भी होती है. सेंटर ऑफर ह्यूमेन इकोनमी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के ओकलाहोमा, टेक्सास, मिसीसिपी, जॉर्जिया और कैलिफोर्निया में लड़ाकू मुर्गों के कई अवैध फार्म हैं. दलाल लैटिन अमेरिका और एशियाई देशों के रास्ते इन मुर्गों को फिलीपींस और करीब दो दर्जन देशों में अवैध तरीके से सप्लाई करते हैं.
कोरियन एयर और अन्य एयरलाइंस मोटी फीस वसूलकर अमेरिका से इन जंगी मुर्गों को फिलीपींस पहुंचाती रही हैं. पशु कल्याण संगठन लंबे अरसे से इसका विरोध करते हुए बैन करने की मांग करते रहे हैं. अब कोरियन एयर ने एनिमल वेलफेयर संगठनों के भारी विरोध को देखते हुए ऐलान किया है कि वह अमेरिका से मुर्गों को फिलीपींस नहीं लाएगी. कोरियन एयर ने भले ही अमेरिका से फाइटर मुर्गों को लाने पर बैन लगा दिया हो, लेकिन क्या खूनी मुर्गों की तस्करी रुक पाएगी, ये वक्त ही बताएगा.













