कनाडा में मंदिरों के बाहर प्रदर्शन की योजना बना रहे खालिस्तानी संगठन, हिंदू समूहों ने की निंदा

सीओएचएनए ने पील रीजनल पुलिस द्वारा ब्रैम्पटन में ‘पब्लिक न्यूसेंस डेमोंस्ट्रेशन से पूजा स्थलों की सुरक्षा’ से जुड़े बाय-लॉ को लागू करने के वादे का स्वागत किया और उसकी सराहना की.

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कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के भारत से काफी अच्छे संबंध हैं. ऐसे में उम्मीद है कि वो इस मसले में कार्रवाई करेंगे.
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  • हिंदू समर्थक संगठनों ने कनाडा में खालिस्तानी समूह एसएफजे के मंदिर विरोध प्रदर्शन की कड़ी निंदा की है
  • हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन ने पुलिस से मंदिरों और भक्तों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की है
  • कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने एसएफजे के हिंसक इतिहास और धार्मिक उत्पीड़न की गंभीर चिंता व्यक्त की है
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दुनिया भर में हिंदू समर्थक कई संगठनों ने शुक्रवार को खालिस्तानी कट्टरपंथी ग्रुप सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कनाडा में हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के आह्वान की कड़ी निंदा की. संगठनों ने संभावित गड़बड़ी पर चिंता जताई और अधिकारियों से धार्मिक जगहों व समुदायों की सुरक्षा पक्का करने की अपील की. एसएफजे ने हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (एचसीएफ) के विरोध में 5 अप्रैल को ब्रैम्पटन में त्रिवेणी मंदिर और सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के सामने “खालिस्तान जिंदाबाद” रैलियों की घोषणा की.

पुलिस से मांगी मदद

एचसीएफ ने प्लान की गई रैलियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “भारत में उनकी पुरानी जड़ों या स्थानीय सांस्कृतिक पहचान की वजह से हिंदू समुदाय को टारगेट करना स्पष्ट रूप से जेनोफोबिया और हिंदूफोबिया है.” संगठन ने कनाडाई पुलिस से 5 अप्रैल को मंदिर परिसर और भक्तों के लिए पूरे दिन सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की. इसके साथ ही खालिस्तानी कट्टरपंथी समूहों के प्लान किए गए विरोध को लेकर संगठन ने कहा कि उनका हिंसक और कट्टरपंथी व्यवहार का इतिहास रहा है.

इस बीच, कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) ने भी एसएफजे के हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध करने की योजना की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इस कट्टरपंथी समूह के हिंसा के पिछले रिकॉर्ड पर चिंता जताई. सीओएचएनए ने हिंदू भक्तों पर मध्ययुगीन तरीके का हमला और 3 नवंबर, 2024 को मंदिरों पर हमला किया.संगठन ने कहा कि जो हिंदू भक्त प्रार्थना और आध्यात्मिक जुड़ाव के लिए मंदिरों में जाते हैं उन्हें अक्सर मंदिर के गेट पर जोरदार और गाली-गलौज वाले प्रदर्शनों के साथ-साथ हिंसक हालात और आतंकवाद के महिमामंडन का सामना करना पड़ता है.

पूरे समुदाय के खिलाफ विरोध 

सीओएचएनए ने कहा, "यह कुछ और नहीं बल्कि धार्मिक कट्टरता और लक्षित उत्पीड़न है जिसे 'बोलने की आजादी' और 'राजनीतिक अभिव्यक्ति' के नाम पर दिखाया जाता है. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हिंदू कनाडाई फाउंडेशन को भी बोलने की आजादी है, और एक संगठन को चुप कराने के लिए पूरे समुदाय के खिलाफ विरोध की धमकी देना कनाडा के निष्पक्षता के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन है."

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सीओएचएनए ने पील रीजनल पुलिस द्वारा ब्रैम्पटन में ‘पब्लिक न्यूसेंस डेमोंस्ट्रेशन से पूजा स्थलों की सुरक्षा' से जुड़े बाय-लॉ को लागू करने के वादे का स्वागत किया और उसकी सराहना की. इसने कहा कि त्रिवेणी मंदिर के चारों ओर 100 मीटर का सेफ्टी जोन बनाकर, कनाडाई अधिकारियों ने आखिरकार यह मान लिया है कि बोलने के अधिकार में किसी जमात को शारीरिक या मानसिक तौर पर घेरने का अधिकार नहीं है. संगठन ने सरे की पुलिस और अधिकारियों से तुरंत ध्यान देने और लक्ष्मी नारायण मंदिर के लिए भी ऐसे ही सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा.

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