'शांतिवार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे जेडी वेंस', ईरान से सीजफायर के बीच ट्रंप का बड़ा बयान

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के 10-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव को संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समझौते की नींव के तौर पर स्वीकार कर लिया. हालांकि, ईरान की कुछ मांगें ऐसी हैं जिनके अंतिम रूप लेने की संभावना बहुत कम है.

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ट्रंप ने कहा कि इस्लामाबाद नहीं जाएंगे वेंस
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  • ट्रंप ने सीजफायर समझौते के बाद ईरान के साथ शांति वार्ता जल्द होने की उम्मीद जताई है
  • ईरान ने युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किया था जिसे सीजफायर समझौते के तहत फिर से खोलने की बात कही है
  • संघर्ष के अंतिम समाधान में ईरान के जहाज़ों से टोल वसूलने और एनरिच्ड यूरेनियम की सुरक्षा पर भी विचार किया जाएगा
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ईरान से सीजफायर हुए अभी 24 घंटे का समय भी नहीं बीता है और इधर अमेरिका ने शांतिवार्ता को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने जा रहे इस शांतिवार्ता में अब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल नहीं होंगे. उन्होंने अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में ये बात कही है. उन्होंने कहा कि 'द पोस्ट' को बताया कि मंगलवार को हुए सीज़फ़ायर समझौते के बाद, उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ शांति वार्ता पाकिस्तान में "बहुत जल्द" होगी लेकिन सुरक्षा चिंताओं के चलते उपराष्ट्रपति JD वेंस शायद इसमें शामिल न हों.

शांतिवार्ता के लिए ट्रंप ने जो टीम बनाई है उसमें वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ शामिल हैं. इसी टीम ने पाकिस्तान के नेताओं के साथ मिलकर 39 दिनों से जारी लड़ाई को खत्म करने के लिए बातचीत की; इसके बाद पाकिस्तान ने शुक्रवार तक इस्लामाबाद में एक शिखर सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है.एक फ़ोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वहां स्टीव विटकॉफ़, जेरेड कुशनर और JD होंगे. शायद JD भी हों, मुझे पक्का नहीं पता। सुरक्षा और हिफ़ाज़त को लेकर कुछ सवाल हैं. ट्रंप ने कहा कि आमने-सामने होने वाली ये बातचीत "बहुत जल्द होगी सच कहूँ तो, यह बहुत जल्द होने वाली है. 

मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के 10-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव को संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समझौते की नींव के तौर पर स्वीकार कर लिया. हालांकि, ईरान की कुछ मांगें ऐसी हैं जिनके अंतिम रूप लेने की संभावना बहुत कम है.ट्रंप ने 28 फ़रवरी को इज़रायल के साथ मिलकर इस युद्ध की शुरुआत की थी. व्हाइट हाउस ने इस युद्ध के चार मुख्य उद्देश्य बताए थे: तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, उसकी नौसेना को नष्ट करना, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन साइटों को तबाह करना और प्रॉक्सी (छद्म) गुटों को दिए जाने वाले उसके समर्थन को खत्म करना.

सीज़फ़ायर समझौते में एक शर्त यह भी शामिल थी कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाज़रानी के लिए फिर से खोल दिया जाएगा; ईरान ने युद्ध के दौरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया था.इस संघर्ष के अंतिम समाधान में, संभवतः ईरान की उस योजना पर भी विचार किया जाएगा जिसके तहत वह जहाज़ों से टोल (शुल्क) वसूलना चाहता है; साथ ही, ज़मीन की गहराई में दबाकर रखे गए 'एनरिच्ड यूरेनियम' (समृद्ध यूरेनियम) को सुरक्षित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. 

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