इजरायल में हर किसी को आर्मी ज्वाइन करना अनिवार्य, सिर्फ एक समुदाय को क्यों मिली छूट? सेना प्रमुख ने उठाए सवाल

Israel Iran War: ईरान जंग के बीच इजराइल सेना पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने चेतावनी दी कि बढ़ते ऑपरेशनल दबाव और सैनिकों की कमी के कारण इजरायली सेना “खुद ही अंदर से टूट सकती है.”

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Israel Iran War: इजरायल में एक समुदाय को अनिवार्य मिलिट्री सेवा से छूट
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  • इजरायल में हरदी समुदाय के पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट दी जाती है जो विवाद का कारण बन रही है
  • इजरायली सेना प्रमुख ने बढ़ते दबाव के बीच सबके लिए अनिवार्य सैन्य सेवा कानून बनाने की मांग की है
  • 1948 में स्थापित व्यवस्था के तहत हरदी समुदाय के पुरुष धार्मिक अध्ययन के कारण सेना से मुक्त रखे जाते हैं
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क्या आपको पता है कि इजरायल में एक समुदाय को छोड़कर बाकि सभी समुदाय के पुरुषों के लिए मिलिट्री में सेवा देना अनिवार्य है. लेकिन जब बार-बार की जंग लड़ने की वजह से इजरायल की सेना कोलैप्स (ढहने) होने के कगार पर पहुंच गई है, इस एक समूदाय को मिली छूट ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. इस समुदाय का नाम हरदी है जो अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय है. अब तो खुद इजरालयी सेना के चीफ और विपक्ष के मुख्य नेता ने इन्हें भी अनिवार्य मिलिट्री सेवा में शामिल करने की मांग उठा दी है.

दरअसल ईरान जंग के बीच इजराइल रक्षा बल (IDF) पर लगातार बढ़ता दबाव दिखाई दे रहा है. सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने चेतावनी दी कि बढ़ते ऑपरेशनल दबाव और सैनिकों की कमी के कारण इजरायली सेना “खुद ही अंदर से टूट सकती है.” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “रिजर्व सैनिक अब इस स्थिति को संभाल नहीं पाएंगे” और सेना को तुरंत एक अनिवार्य भर्ती कानून की जरूरत है. उनका संकेत ऐसा कानून बनाने की ओर था जो अब तक सैन्य सेवा से काफी हद तक मुक्त रहे हरदी समुदाय के लोगों की भर्ती की अनुमति देगा.

Q- आखिर एक समुदाय को क्यों मिली है छूट?

 1948 में इजरायल के गठन के बाद से ही इस समुदाय के लोगों को सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है. इजरायल में सामान्य रूप से सैन्य सेवा अनिवार्य है, लेकिन देश की स्थापना के समय एक व्यवस्था बनाई गई थी जिसके तहत वे हरदी समुदाय के पुरुष जो अपना पूरा समय पवित्र यहूदी धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में लगाते हैं, उन्हें सेना में सेवा से छूट दी जाती है. उस समय यह अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय बहुत छोटा था, इसलिए यह व्यवस्था ज्यादा विवादित नहीं थी.

Q- कैसे हो रही राजनीति?

अब स्थिति बदल चुकी है और सेना पर बढ़ते दबाव के बीच इस छूट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी सरकार बनाए रखने के लिए अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियों के समर्थन पर निर्भर हैं. इसी कारण उन्होंने इस कानून को पारित करने में देरी करने के लिए कई तरह की रणनीतियां अपनाई हैं.

दूसरी ओर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां अपने समुदाय के लिए सैन्य सेवा से छूट बनाए रखने के लिए कानून लाने की मांग कर रही हैं. यह स्थिति तब और जटिल हो गई जब 2024 में इजरायल की उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि हरदी येशिवा छात्रों को दी जा रही इस लंबे समय से चली आ रही छूट का कोई कानूनी आधार नहीं है. रिपोर्टों के अनुसार वर्तमान में 18 से 24 वर्ष के बीच के लगभग 80,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुष ऐसे हैं जो सैन्य सेवा के लिए पात्र हैं, लेकिन अब तक सेना में शामिल नहीं हुए हैं.

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