ईरान ऑक्टोपस का सिर, हिज्बुल्लाह उसके हाथ...इजरायली जनरल ने बताया युद्ध का असली टारगेट, अब होगा फाइनल प्रहार

IDF प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा है कि इजरायल का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उसकी सैन्य और परमाणु ताकत को नष्ट करना है.उन्होंने हिज्बुल्लाह को कमजोर होता हाथ बताया.

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  • IDF प्रवक्ता ने कहा कि हिजबुल्लाह की गोलीबारी से तनाव बढ़ा है और इजरायल अब पीछे नहीं हटेगा
  • जनरल डेफ्रिन ने ईरान को ऑक्टोपस का सिर बताया और हिजबुल्लाह को उसका सबसे बड़ा हाथ करार दिया
  • इजरायल का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि उसकी सैन्य ताकत को बैलिस्टिक मिसाइलों से खत्म करना है
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इजरायल और हिज्बुल्लाह-ईरान के बीच तनाव चरम पर है. युद्ध के 15वें दिन इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा है कि इजरायल अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है. NDTV को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि करीब 10 दिन पहले हिज्बुल्लाह के फिर से गोलीबारी शुरू करने के फैसले से ही मौजूदा तनाव बढ़ा है और इजराइल का इसे रोकने का कोई इरादा नहीं है. हिज्बुल्लाह ने गोलियां चलाईं, वे इसके नतीजे जानते थे और अब हम उन पर बहुत मजबूती से पलटवार कर रहे हैं

ईरान है 'ऑक्टोपस का सिर', इजरायल नहीं चाहता सत्ता परिवर्तन

जनरल डेफ्रिन ने ईरान और हिज्बुल्लाह के कनेक्शन को 'ऑक्टोपस' की संज्ञा दी है. उन्होंने कहा, 'तेहरान (ईरान) ऑक्टोपस का सिर है और लेबनान में हिज्बुल्लाह उसका सबसे बड़ा हाथ है. जब आप ईरान पर वार करते हैं, तो लेबनान में हिज्बुल्लाह खुद कमजोर हो जाता है. उन्होंने यह भी साफ किया कि इजरायली सेना का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन करना नहीं है, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइलों, परमाणु प्रोग्राम और एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करके उसकी सैन्य ताकत को पूरी तरह तोड़ना है.

हिज्बुल्लाह में खौफ, लेबनानी नागरिक भी हैं खिलाफ

IDF प्रवक्ता ने दावा किया कि हिज्बुल्लाह इस वक्त भारी घबराहट में है क्योंकि वह अपने स्पॉन्सर, फाइनांसर और ट्रेनर यानी ईरान को खोता जा रहा है. लेबनान के एक ईसाई बहुल गांव से हिज्बुल्लाह ने एंटी-टैंक मिसाइलें दागने की कोशिश की थी, जिसे रोकने गए एक स्थानीय धार्मिक नेता की इजरायली जवाबी कार्रवाई में जान चली गई.अब खुद लेबनान के लोग और वहां का ईसाई समुदाय इस विनाश के लिए इजरायल को नहीं, बल्कि हिज्बुल्लाह को जिम्मेदार मान रहा है क्योंकि वे समझ गए हैं कि हिज्बुल्लाह लेबनान के लिए बड़ा खतरा है. लेबनान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा प्रमुख की ओर से इजरायल के साथ सीधी बातचीत की मांग भी उठ रही है.

'ईरानी अवाम से हमारी कोई दुश्मनी नहीं'

इजरायल ने साफ किया है कि ईरानी नागरिकों से उसकी कोई दुश्मनी नहीं है और वह भविष्य में उनके साथ शांति कायम करना चाहता है. डेफ्रिन ने कहा कि ईरान की 70 प्रतिशत से अधिक जनता मौजूदा सरकार का विरोध कर रही है और ईरानी सरकार खुद अपने प्रदर्शनकारी नागरिकों पर मशीनगनों से गोलियां बरसा रही है. लेबनान के मुद्दे पर उन्होंने उम्मीद जताई कि बिना हिज्बुल्लाह के लेबनान जल्द ही अब्राहम समझौते का हिस्सा बनेगा और दोनों देशों के बीच शांति संधि होगी.

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