इजरायल चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है और शुरुआती एक्जिट पोल में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. ऐसे में इजरायल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कड़े मुकाबले वाले चुनाव के बाद नई सरकार बनाने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को इजरायल की अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार नहीं चलानी चाहिए. एक्जिट पोल में साफ दिख रहा है कि इस बार के चुनाव में इन अरब पार्टियों ने काफी अच्छी बढ़त हासिल की है और वह किंगमेकर की भूमिका निभा सकती हैं.
नेतन्याहू ने अपने समर्थकों के बीच कहा कि हमें दक्षिणपंथी विचारधारा वाली एक मजबूत सरकार बनानी होगी. नेतन्याहू ने कहा, "यहूदी और जायोनी बहुसंख्यकों को एकजुट होना चाहिए. अरब पार्टियों के समर्थन वाली सरकार का तो सवाल ही नहीं उठता."
स्थानीय समयानुसार रात 3:00 बजे के बाद दिए गए यह भाषण नेतन्याहू के अपनी स्टाइल से छोटा था और उन्होंने सीधे तौर पर जीत का दावा नहीं किया, सिर्फ इतना कहा कि उनकी पार्टी लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है. बता दें कि इजरायली अरब पार्टियों ने काफी अच्छी बढ़त हासिल की है, जिससे विपक्ष के लिए सत्ता में आने का रास्ता खुल सकता है. हालांकि, नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइसेनकोट ने कहा है कि वह इस अल्पसंख्यक समूह के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाएंगे.
एक्जिट पोल क्या कह रहा
इजरायल में हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मुख्य विरोधी, पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट के बीच बराबरी का मुकाबला दिख रहा है. कम से कम एग्जिट पोल में में तो यही नजर आ रहा है. नेतन्याहू की सरकार वाले गुट और आइजनकोट के बदलाव वाले गुट, दोनों ही 61 सीटों से काफी पीछे दिख रहे हैं. इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी होती हैं, यह बहुमत वाली गोल्डन लाइन है.
दूसरे बड़े चैनल Channel 12 के एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गुट को 50 और आइजनकोट को 52 सीटें मिलती दिख रही हैं. आखिरी नतीजे अगले 48 घंटों में आएंगे. लेकिन इसके बाद कई हफ्तों तक सरकार बनाने के लिए बातचीत चलेगी, तब जाकर तय होगा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा या फिर दोबारा चुनाव कराने पड़ेंगे.
कैसे किंगमेकर हो सकती हैं अरब पार्टियां
एक्जिट पोल बता रहे हैं कि नेसेट यानी इजरायली संसद में अरब पार्टियों का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ सकता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि वे पिछली बार के 10 के बजाय इस बार 18 सीटें जीत सकती हैं. इजरायल की ये अरब पार्टियां मुख्य रूप से इजरायल में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों (इजरायली-फिलिस्तीनी) का ही प्रतिनिधित्व करती हैं.
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एग्जिट पोल के मुताबिक मुख्य विपक्षी नेता आइजेनकोट को बहुमत नहीं मिलता है, तो उन्हें सरकार बनाने की कोशिश के लिए अरब पार्टियों के गुट- 'जॉइंट लिस्ट' और 'राआम' - के साथ बातचीत करनी पड़ सकती है. इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग सकते हैं. ऐसा लगता है कि दूसरी तरफ मौजूदा रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज रूढ़िवादी इजरायली यहूदियों के बीच समर्थन जुटाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि नेतन्याहू के चुनावी नारे "दक्षिणपंथी या फिलिस्तीन" का रुख सही था.
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