- पाकिस्तान ने सऊदी अरब को F-16 फाइटर जेट्स भेजे हैं, जो दोनों देशों के संयुक्त रक्षा समझौते के तहत किया गया है
- यह तैनाती क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को समर्थन देने तथा सैन्य समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है
- पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच डिफेंस डील में एक देश पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा
1947 में मजहब के आधार पर भारत के टुकड़े कर बने नए देश पाकिस्तान की एक फितरत रही है. पीछे से छुरा घोंपने की...भारत से बेहर इसे कौन समझ सकता है. जब देश ने दोस्ती के बहाने भरोसा किया, पाकिस्तान ने 1947 में कबाली भेजकर हमले करवाए, 1999 में कारगिल का युद्ध और 2016 में पीएम मोदी के पाकिस्तान जाने के बाद पंजाब के पठानकोट पर हमला करवा दिया. भले भारत से जीत सिर्फ उसका ख्याल हो पर धोखा देना उसे बहुत आता है. अब पाकिस्तान ईरान को भी धोखा देने की तैयारी कर रहा है. उसका सउदी अरब को F-16 फाइटर जेट भेजना इसका ताजा उदाहरण है. पाकिस्तान-सउदी अरब के बीच एक डिफेंस डील जिसमें एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा भी इसका एक और उदाहरण है. इधर अमेरिका से ईरान की शांति वार्ता फेल हो गई है, ऐसे में फिर से युद्ध की आहट के बीच पाकिस्तान भी नई चाल चल रहा है.
इधर शांति वार्ता, उधर भेज दिए लड़ाकू विमान
इजरायल-अमेरिका के ईरान से युद्ध का असर सउदी अरब पर भी हुआ है. ईरान ने उसे भी चोट पहुंचाई है फिर वह मुख्य ठिकानें हों या यूएस के सैन्य बेस, खामेनेई के देश ने उसे भी नहीं बख्शा. अब चूंकि ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर जारी है, पाकिस्तान ने पीछे से सउदी अरब को F-16 फाइटर जेट्स भिजवा दिए हैं. दोनों के बीच डिफेंस पैक्ट पर भी हस्ताक्षर हुए थे जिसके बाद यह तय हुआ था कि एकदूसरे के देश पर हमला खुद पर हुआ हमला माना जाएगा.
सउदी के विदेश मंत्री से मिले शहबाज, ईरानी हमलों को रोकने मुनीर पहुंचे थे रियाद
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता से पहले पीएम शहबाज शरीफ ने सउदी अरब के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल‑जदान से पाकिस्तान में ही मुलाकात की थी. इस बैठक में उप‑प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर भी मौजूद थे. तब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की जनता और सरकार हमेशा हर मौके पर अपने सऊदी भाई‑बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच यह रिश्ता समय के साथ और मजबूत हुआ है, खासकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में. शहबाज शरीफ ने वर्षों से पाकिस्तान को मिलते आ रहे सऊदी अरब के आर्थिक और वित्तीय समर्थन को भी स्वीकार किया, जो देश की आर्थिक स्थिरता में अहम भूमिका निभाता रहा है. उन्होंने दो पवित्र मस्जिदों के संरक्षक किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को शुभकामनाएं भी भेजीं. वहीं सऊदी वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे भाईचारे और मजबूत रिश्तों को और आगे बढ़ाने के सऊदी अरब के संकल्प को दोहराया था.
सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर मार्च की शुरुआत में रियाद गए थे, जहां उन्होंने समझौते के तहत ईरान की ओर से हो रहे हमलों को रोकने के उपायों पर चर्चा की थी.दोनों देशों ने पाकिस्तान के लिए घोषित 5 अरब डॉलर के सऊदी निवेश पैकेज को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी. सऊदी अरब में लगभग 25 लाख पाकिस्तानी कामगार रहते हैं, जिनकी भेजी गई रकम पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को सहारा देती है.सऊदी अरब ने समय‑समय पर पाकिस्तान को वित्तीय मदद भी दी है.2018 में, रियाद ने पाकिस्तान के लिए 6 बिलियन डॉलर के सपोर्ट पैकेज का ऐलान किया था, जिसमें सेंट्रल बैंक में 3 बिलियन डॉलर का डिपॉजिट और डेफर्ड पेमेंट पर 3 बिलियन डॉलर की तेल सप्लाई शामिल थी.
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अगर सऊदी का साथ देकर पाकिस्तान ने कर दिया ईरान पर हमला तो?
सउदी अरब से मिल रही भीख और सुरक्षा समझौते के तहत यह माना जा रहा है कि शांति वार्ता फेल होने के बाद अगर युद्ध फिर शुरू होता है तो ऐसे में पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ दे सकता है. इस्लामाबाद में स्थित सुरक्षा विशेषज्ञ इम्तियाज गुल ने अल जजीरा से कहा कि पाकिस्तान का सऊदी अरब को फाइटर जेट भेजना या वहां विमान की तैनाती कोई सैन्य तनाव बढ़ाने वाला कदम नहीं है, बल्कि ईरान को पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं का संदेश देने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि तीन लड़ाकू विमान सैन्य रूप से कोई बड़ा फर्क नहीं डालते, खासकर सऊदी अरब की अपनी वायुसेना की ताकत को देखते हुए. उनका कहना था कि यह कदम तेहरान को बातचीत में लचीला रुख अपनाने का संदेश देता है और साथ‑साथ यह भी दिखाता है कि पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ रणनीतिक समझौते के तहत कुछ दायित्व हैं.
➔ युद्ध शुरू हुआ तो ईरान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ना तय है
➔पूरे मिडिल ईस्ट में और तनाव बढ़ सकता है,कई देश इसमें खिंच सकते हैं
➔तेल और व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा
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