ट्रंप की धमकी को धुएं में उड़ा रहे ईरान के लोग, युद्ध के बीच तेहरान के पार्क में हुक्का पार्टी-Photos

ईरान के लोग युद्ध के बीच भी पार्कों में हुक्का पार्टी और बारबेक्यू कर शांतिपूर्ण माहौल बनाए हुए हैं.

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ट्रंप की धमकियों के बीच के बीच तेहरान के लोग 'हर फिक्र को घुएं' में उड़ाते नजर आ रहे हैं.
Reuters
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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर इतनी बमबारी की धमकी दी कि देश पाषाण युग में पहुंच जाएगा
  • धमकी के बावजूद लोग पार्कों में हुक्का पार्टी और बारबेक्यू का आनंद ले रहे हैं
  • ईरान में फारसी नए साल के अंतिम दिन सिजदा-बेदार पर लोग खुले आसमान के नीचे परंपरा निभा रहे हैं
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन कहा था कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर इतनी बमबारी करेगा कि देश 'पाषाण युग' में पहुंच जाएगा. इन धमकियों के बीच तेहरान 'हर फिक्र को घुएं' में उड़ाता नजर आ रहा है. दरअसल एक तरफ तो ईरान में आसमान से आग बरस रही है और शक्तिशाली धमाकों से राजधानी दहल रही है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के लोग खौफ को दरकिनार कर पार्कों में हुक्का पार्टी और बारबेक्यू का लुत्फ उठा रहे हैं. ऐसा लग रहा है मानो तेहरान की जनता ने ट्रंप की धमकियों को धुएं में उड़ाने की कसम खा ली है.

यह युद्ध अब एक महीने से ज्यादा लंबा खिंच चुका है. 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ट्रंप ने अगले दो-तीन हफ्तों तक और भीषण हमलों की चेतावनी दी है. बीते दिन भी तेहरान में कई भारी धमाके हुए, लेकिन इन सबके बावजूद शहर के पार्कों में सैकड़ों परिवार अपने पारंपरिक अंदाज में पिकनिक मनाते दिखे.

जंग के बीच 'सिजदा-बेदार' की रस्म

बीते दिन ईरानियों के लिए उनके फारसी नए साल के जश्न का आखिरी दिन था. इसे 'सिजदा-बेदार' या 'प्रकृति दिवस' कहा जाता है. सदियों पुरानी इस परंपरा के मुताबिक, साल के 13वें दिन घर से बाहर निकलकर वक्त बिताना शुभ माना जाता है ताकि आने वाली बदकिस्मती को दूर किया जा सके. अलबोर्ज पहाड़ों की बर्फबारी के बीच खुले आसमान के नीचे बैठे लोगों के लिए यह युद्ध किसी बाहरी शोर से ज्यादा कुछ नहीं था.

पार्क में अपनी थकान मिटाने पहुंची 39 वर्षीय रोया अबहारी ने कहा, "मैंने राष्ट्रपति ट्रंप की बातें सुनीं जिसमें उन्होंने हमें पाषाण युग में भेजने की बात कही थी. मुझे हैरानी हुई कि क्या वाकई ऐसा मुमकिन है? लेकिन हमने तय किया है कि हालात चाहे जो हों, हम अपनी परंपराओं को नहीं छोड़ेंगे. हम यहां लोगों के बीच खुद को रिचार्ज करने आए हैं."

मौत के साये में जश्न मना रहे ईरानी

पार्कों के भीतर का माहौल किसी को भी हैरान कर सकता है. घास पर बिछे कालीनों पर चाय के प्याले सज रहे थे और गैस स्टोव पर खाना पक रहा था. कहीं कोई कबाब की सीखों पर पंखा झल रहा था. कहीं बुजुर्गों की टोली पुराने गाने गाकर माहौल को खुशनुमा बना रही थी. युद्ध की विभीषिका के बीच युवा जोड़े बैडमिंटन खेल रहे हैं, मानो शहर पर कोई खतरा ही न हो.

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43 साल के मेटल वर्कर हकीम रहीमी ने बेहद निडर होकर कहा, "यह जंग हमारे लिए कुछ भी नया नहीं है. हमारी जिंदगी सामान्य तरीके से चल रही है और हमें किसी भी युद्ध का कोई डर नहीं है." 

हालांकि, यह उत्साह शहर के उन हिस्सों से बिल्कुल अलग था जहां बमबारी ने तबाही मचा रखी थी और लोग अपनों की मौत का गम मना रहे थे. 

जश्न से इतर मातम का भी माहौल 

पार्क की इस रौनक के पीछे एक भयानक सच यह भी है कि उसी सुबह तेहरान के एक 100 साल पुराने मेडिकल सेंटर पर हवाई हमले हुए. इस हमले में अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गया.

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शहर के ये पार्क पहले प्रदूषण से बचने का जरिया हुआ करते थे, अब लोगों के लिए युद्ध के मानसिक तनाव से बचने का 'सेफ हाउस' बन गया हैं.

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