ईरान की अमेरिका को खुली चुनौती, कहा- 'अगर हमला हुआ तो US सेना और इजरायल हमारे निशाने पर होंगे'

विरोध-प्रदर्शन के बीच ईरान ने अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी सेना और इजरायल हमारे निशाने पर होंगे. ये सीधी चेतावनी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने दी है. क़ालिबाफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े रहे हैं.

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ईरान में बीते दो सप्ताह से विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है.
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  • ईरान में आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन 14 दिनों से लगातार जारी हैं.
  • इस बीच ईरान ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुआ कहा कि हमला हुआ तो US मिलिट्री बेस और इजरायल निशाने पर होंगे.
  • इस विरोध प्रदर्शन में अब तक कम से कम दो सौ तीन लोगों की मौत हुई है, वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है.
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Iran Protest: ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शनकारियों की भीड़ सड़कों पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध कर रही है. इस बीच ईरान ने अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी सेना और इजरायल हमारे निशाने पर होंगे. ईरान की ओर ये सीधी चेतावनी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने दी है. क़ालिबाफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े रहे हैं. ऐसे में देश में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच उनका यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है.

संसद में स्पीकर बोले- हमला हुआ तो अमेरिकी सेना और इजरायल हमारे निशाने पर होंगे

दरअसल ईरानी संसद में बोलते हुए स्पीकर मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो "कब्जे वाले इलाके यानी इजरायल, अमेरिकी सैन्य अड्डे और युद्धपोत हमारे वैध निशाने होंगे." इस दौरान ईरानी संसद में सांसदों ने मंच पर घेराबंदी करते हुए "अमेरिका की मौत" के नारे लगाए. मालूम हो कि विरोध-प्रदर्शन के कारण ईरान में इस समय इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया गया है और फोन लाइनें काट दी गई हैं, जिससे बाहरी दुनिया के लिए सटीक जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया है.

न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के अनुसार ईरान में विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 203 लोग मारे गए हैं. लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

राष्ट्रपति मसूद ने भी की तीखी टिप्पणी

दूसरी ओर ईरान में उग्र विरोध प्रदर्शन के तीन दिन बीत जाने के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तल्ख टिप्पणी की है. उन्होंने 'दंगाइयों और आतंकवादियों' की आड़ में ईरानी समाज में गड़बड़ी फैलाने वालों की निंदा की है. पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका और इजरायल दंगों का ऑर्डर देकर ईरान में अफरा-तफरी और गड़बड़ी फैलाना चाहते हैं.



उन्होंने ईरान के लोगों से "दंगाइयों और आतंकवादियों" से दूरी बनाने की अपील की. ​​रविवार (11 जनवरी) को देश को संबोधित करते हुए, पेजेशकियन ने ईरान के लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों और चिंताओं पर ध्यान देगी और चेतावनी दी कि दंगाइयों को समाज में गड़बड़ी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

दंगाइयों को समाज में गड़बड़ी फैलाने की इजाजत नहीं देनी चाहिएः ईरानी पीएम

पेशाकियान ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “ईरानियों को दंगाइयों को समाज में गड़बड़ी फैलाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए. लोगों को यह समझना होगा कि सरकार न्याय चाहती है.” पेजेशकियान ने कहा, “लोग फिक्रमंद हैं; हमें भी एहसास है.” विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत के बाद पहली बार पेजेशकियान ने ईरानियों को कुछ राहत देने के लिए एक आर्थिक प्लान भी पेश किया. प्रतिबंधों से प्रभावित देश अभी भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है.

तेहरान में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन, इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद भी 14 दिन से जारी

ये विरोध प्रदर्शन, जो ईरान की राजधानी तेहरान में रहने के बढ़ते खर्च और बढ़ते आर्थिक संकट के खिलाफ छोटे-छोटे प्रदर्शनों के तौर पर शुरू हुए थे, अब बड़े पैमाने पर सुरक्षा कार्रवाई और पूरे इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद लगातार चौदहवें दिन में पहुंच गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन को हटाने की मांग की है.

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निर्वासित क्राउन प्रिंस को आंदोलन का समर्थन

तेहरान की सड़कों पर लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने संकेत दिया है कि वह वापस आएंगे और प्रदर्शनकारियों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की है.

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