अमेरिकी मिसाइल और बम भी नहीं रोक पाए ईरान का तेल, खार्ग द्वीप से सुपरटैंकरों की सप्लाई जारी

अमेरिकी हमलों और ट्रंप की धमकियों के बावजूद ईरान के खार्ग द्वीप से कच्चे तेल का निर्यात सामान्य रूप से जारी है. सैटेलाइट डेटा और रिमोट सेंसिंग विश्लेषण से इसका खुलासा हुआ है.

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खर्ग द्वीप ईरान का मुख्य ऊर्जा केंद्र है और देश के 80–90% तेल निर्यात को संभालता है
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  • ईरान के खार्ग द्वीप से कच्चे तेल के निर्यात में युद्ध और अमेरिकी हमलों के बावजूद कोई कमी नहीं आई है
  • फरवरी अंत से हर दिन लगभग तीन सुपरटैंकर खार्ग द्वीप से तेल लोड कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजे जा रहे हैं
  • अधिकांश टैंकर बहुत बड़े वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स होते हैं जो लगभग बीस लाख बैरल तेल ले जाने में सक्षम हैं
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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और अमेरिकी सेना के हमलों के बावजूद ईरान के मुख्य ऊर्जा केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) से कच्चे तेल का निर्यात हो रहा है. रिमोट सेंसिंग डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि खार्ग द्वीप से कच्चा तेल लोड करने वाले सुपरटैंकरों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. ऐसा तब है जब अमेरिकी सेना ने द्वीप के कुछ हिस्सों पर बमबारी की है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ज़ब्त करने की धमकी दी है.

NDTV Datafy द्वारा विश्लेषण किए गए रिमोट सेंसिंग डेटा से पता चलता है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद से, खार्ग द्वीप पर हर दिन औसतन तीन बड़े तेल टैंकर कच्चा तेल लोड कर रहे हैं.

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल सैटेलाइट द्वारा ली गई ऑप्टिकल और SAR तस्वीरों के अनुसार, 1 मार्च के बाद से केवल कुछ ही दिन ऐसे रहे, जब खार्ग पर दो या उससे कम सुपरटैंकर तेल लोड करते हुए देखे गए. जिन दिनों की ओपन-सोर्स सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध हैं, उनमें से केवल 3 मार्च को ही खार्ग के टर्मिनलों पर कोई जहाज लंगर डाले हुए नहीं दिखा.

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खार्ग पर देखे गए ज्यादातर टैंकर सुपरटैंकर थे, जिन्हें शिपिंग उद्योग में 'वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स' (VLCCs) के नाम से जाना जाता है. ये जहाज लगभग 20 लाख बैरल या 31.8 करोड़ लीटर कच्चा तेल ले जाते हैं और लंबी दूरी के परिवहन के लिए इस्तेमाल होते हैं. एक VLCC को पूरी तरह से लोड होने में आमतौर पर दो दिन तक का समय लगता है.

समुद्री विश्लेषकों के अनुसार, इनमें से कई जहाजों पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं और वे तथाकथित 'डार्क फ्लीट' यानी अज्ञात बेड़े का हिस्सा हैं. खार्ग से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित असलुयेह तेल और गैस टर्मिनल से भी निर्यात जारी है.

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क्या है ईरान की मंशा?

ईरानी टर्मिनलों से निर्यात का लगातार जारी रहना, तेहरान के अड़ियल रवैये के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति की कमी का फायदा उठाने की उसकी मंशा को भी दर्शाता है. पश्चिम एशिया के अन्य निर्यातकों, जैसे UAE, कतर, कुवैत और सऊदी अरब से ऊर्जा की आपूर्ति में काफी गिरावट आई है. इसकी वजह ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और इस क्षेत्र में तेल ठिकानों पर हुए हमलों के कारण उत्पादन में आई कमी है.

अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर ठिकानों पर हमले किए हैं और राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार इस ठिकाने पर कब्जा करने की धमकी दी है. 13 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बड़े पैमाने पर सटीक हवाई हमले किए, जिनमें द्वीप पर 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. इनमें नौसेना की बारूदी सुरंगों के भंडारण केंद्र, मिसाइल बंकर और रक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे शामिल थे. कुछ दिनों बाद इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर बमबारी की.

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