- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर वार्ता का दूसरा दौर पाकिस्तान में नहीं हो पाया है
- ईरान ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और युद्ध समाप्ति के लिए नया शांति प्रस्ताव दिया है
- प्रस्ताव में परमाणु वार्ता को बाद के चरण के लिए स्थगित करने और युद्ध खत्म करने की बात कही गई है
US Iran War and Peace Deal talks: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होगा भी या नहीं? यह सवाल हर बीतते दिन के साथ अहम होता जा रहा है क्योंकि दोनों ही देश झुकने से इनकार कर रहे हैं. पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता नहीं हो पाई है, ऐसा लगता है कि दोनों देश बातचीत के लिए एक मेज पर बैठना ही नहीं चाहते. अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी कह दिया है कि वो अपने लोगों को 18 घंटे की फ्लाइट पर बैठाकर पाकिस्तान नहीं भेजेंगे, अगर ईरान को बात करनी है तो उसके लोग अमेरिका आए या फोन पर बात करें. इन सब नेटेगिव खबरों के बीच एक पॉजिटिव खबर है- ईरान की तरफ से अमेरिका को शांति का एक फॉर्मूला दे दिया गया है.
क्या अमेरिका यह प्रस्ताव मानेगा?
यह मुश्किल लग रहा है. अभी दोनों देशों की जंग में कूटनीति अधर में लटकी हुई है. ईरान और अमेरिका के बीच इस बात पर बहुत गतिरोध है कि ईरान के लिए परमाणु रियायतें क्या होनी चाहिए. अब ईरान ने जो प्रस्ताव दिया है, उसमें परमाणु मुद्दे को ही आगे के लिए स्थगित करने की बात कही गई है. कोशिश है कि अभी के लिए जंग खत्म हो और आगे बातचीत के जरिए परमाणु मुद्दे पर भी सहमति बनाई जाए. लेकिन अमेरिका के लिए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना बहुत मुश्किल होगा. अगर ट्रंप ने अपनी सेना को होर्मुज के आसपास नाकेबंदी हटाने को कह दिया और जंग खत्म कर दिया तो उनके पास ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार को हटाने और तेहरान को परमाणु रास्ते से हमेशा के लिए हटाने का कोई दांव नहीं बच जाएगा- ट्रंप ने इसी उद्देश्य से तो जंग शुरू की थी.
ट्रंप क्या करने वाले हैं?
तीन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप सोमवार को अपनी टॉप की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति टीम के साथ ईरान के मद्दे पर सिचुएशन रूम में बैठक कर सकते हैं. एक सूत्र ने कहा कि ट्रंप की टीम वार्ता में गतिरोध और क्या कर सकते हैं, उन कदमों पर चर्चा करेगी. इससे पहले ट्रंप ने रविवार को फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में संकेत दिया कि वह नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखना चाहते हैं जो ईरान के तेल निर्यात को रोक रही है. उन्हें उम्मीद है कि यह नाकेबंदी अगले कुछ हफ्तों में ईरान को मजबूर कर देगा, वह खुद झुक जाएगा.













