- तेहरान के ऊपर बने जहरीले बादल दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के कारण भारत की ओर नहीं बढ़ेंगे.
- दक्षिण-पश्चिमी हवाएं प्री-मॉनसून सीजन में सामान्य होती हैं और फिलहाल इनका रुख पश्चिमी चीन की ओर है.
- तेहरान में तेल रिफाइनरी हमलों से फैलने वाले रसायन तेजाबी बारिश पैदा कर सकते हैं जो पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं.
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि तेहरान के ऊपर छाए जहरीले बादल हवा के रुख के साथ एशिया के अन्य देशों में फैल सकते हैं. कई पोस्ट में दावा किया गया कि ये बादल मध्य एशिया होते हुए पश्चिमी चीन और फिर भारत का रुख कर सकते हैं. लेकिन मौसम और वायु‑प्रवाह का विश्लेषण करने वाले एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल भारत को किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है.
दक्षिण‑पश्चिमी हवाएं रोकेंगी जहरीले बादलों का रास्ता
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय दक्षिण‑पश्चिमी हवाएं सक्रिय हैं, जो प्री‑मॉनसून सीजन में सामान्य होती हैं. इन हवाओं की दिशा ऐसी है कि तेहरान के ऊपर बने प्रदूषित बादल भारत की ओर नहीं मुड़ेंगे. हवा का मौजूदा रुख इन बादलों को कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और पश्चिमी चीन की ओर धकेलता है, जिससे भारत सुरक्षित है.
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जल्दी गर्मी आने से भारत को राहत
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इस बार गर्मी जल्दी आने से हवा का रुख सामान्य से 15-20 दिन पहले बदल गया. अगर उत्तर‑पश्चिमी हवाएं चल रहीं होतीं, तो भारत के लिए खतरा बढ़ सकता था. लेकिन अभी की परिस्थितियां भारत के लिए राहत भरी हैं.
क्या हैं ये काले बादल और एसिड रेन का खतरा?
तेहरान में तेल रिफाइनरी पर हमलों के बाद वातावरण में राख, हाइड्रोकार्बन, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायन फैल गए हैं. ये कण जब पानी की भाप से मिलते हैं तो रिएक्शन के बाद तेजाबी बारिश (Acid Rain) का कारण बनते हैं. ऐसी बारिश मिट्टी, पौधों, जलस्रोतों को नुकसान पहुंचा सकती है और मनुष्य के लिए भी हानिकारक होती है. जैसे त्वचा पर फफोले, आंखों में जलन, सांस की समस्याएँ, अस्थमा, कफ, माइग्रेन आदि.
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क्या भारत पूरी तरह सुरक्षित है?
फिलहाल की परिस्थितियां अनुकूल हैं और बादलों के भारत पहुंचने की संभावना बहुत कम है. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, और प्रदूषण लगातार बढ़ता रहा, तो भविष्य में हवा के रुख बदलने पर कुछ असर भारत तक भी पहुंच सकता है. इसको लेकर सैटेलाइट और मौसम प्रणालियों से लगातार निगरानी की जा रही है.














