अमेरिका-इजरायल युद्ध में ईरान का कितना नुकसान.
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- ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध में भारी मानव और बुनियादी ढांचे का नुकसान हुआ है
- ईरान में 1200 से अधिक नागरिक मारे गए, जिनमें 200 से ज्यादा बच्चे और महिलाएं शामिल हैं, हजारों घायल हुए हैं
- युद्ध के कारण ईरान के 25 अस्पतालों में से नौ पूरी तरह से बंद हो गए तथा कई स्वास्थ्य केंद्र भी प्रभावित हुए हैं
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हमें बताएं।ईरान संग इजरायल और अमेरिका जंग का आज 10वां दिन हैं. दोनों एक दूसरे पर जमकर मिसाइलें और ड्रोन दाग रहे हैं. इस लड़ाई में दोनों देशों का जमकर नुकसान हो रहा है. वहीं खाड़ी देशों को दोस्ती की कीमत चुकानी पड़ रही है.लोग मर रहे हैं और इंफ्रास्ट्र्क्चर तबाह हो रहा है. ईरान को भी जंग का बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन करमानपुर ने एक्स पर पोस्ट में कहा, जंग ने ईरान में नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है." उन्होंने जानमाल और बुनियादी ढांचे के नुकसान की जानकारी डिटेल में दी है.
- करमानपुर के मुताबिक, ईरान में 1,200 से ज्यादा नागरिक मारे गए और 10,000 से ज्यादा घायल हुए हैं. मारे गए लोगों में 12 साल से कम उम्र के करीब 200 बच्चे और 200 महिलाएं शामिल हैं. 1,400 महिलाएं घायल भी हुई हैं.
- हमलों से ईरान का हेल्थ सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुआ है. करमानपुर ने बताया कि 25 अस्पताल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनमें से 9 सेवा से बाहर हैं, जबकि 18 इमरजेंसी स्वास्थ्य केंद्र और 14 एम्बुलेंस पूरी तरह तबाह हो गए. इसके अलावा दो काउंटी स्वास्थ्य केंद्र, 17 व्यापक स्वास्थ्य सेवा केंद्र और दो ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा है.
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बढ़ती जंग पर चिंता जताई है. WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने एक पोस्ट में कहा, "ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट संकट में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, 100,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. इन हमलों मेंसे 16 देश प्रभावित हैं. एजेंसी के मुताबिक, ईरान में हेल्थ फेसिलिटी पर 13 हमले और लेबनान में एक हमला हुआ है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा पर हमले मानवीय कानून का उल्लंघन हैं.
- उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस संघर्ष से जन स्वास्थ्य का बड़ा खतरा पैदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि परमाणु खतरे जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं. दुबई में डब्ल्यूएचओ के वर्ल्ड हेल्थ इमरजेंसी फैसिलिटी के लॉजिस्टिक्स हब में असुरक्षा की वजह से फिलहाल कामकाज रुका हुआ है.
- अंतर्राष्ट्रीय निगरानीकर्ताओं की समीक्षा की गई सैटेलाइट तस्वीरों और सत्यापित वीडियो से पता चलता है कि 28 फरवरी को हमले शुरू होने के बाद से स्कूल, अस्पताल और ऐतिहासिक स्थल प्रभावित हुए हैं. हाल के हमलों में सैन्य ठिकानों के पास मौजूद अस्पतालों और अन्य नागरिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बमबारी के जोखिम को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
- ईरान के भीतर लोगों से संपर्क करना मुश्किल होने लगा है. इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे जमीनी हालात की जानकारी नहीं मिल पा रही है. इंटरनेट बंद होने से वीडियो फुटेज देखने को नहीं मिल रहे हैं.
- ईरानी रेड क्रिसेंट एजेंसी (HRNA) ने पाया है कि संघर्ष की शुरुआत से अब तक 30 प्रांतों में हुई 148 घटनाओं में 752 हमले दर्ज किए गए हैं. 8 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक, 1,205 नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 194 बच्चे शामिल हैं, साथ ही 187 सैनिक भी मारे गए हैं. 316 मौतों की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है.
- संगठन ने कहा कि तेहरान को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है, यहां करीब 34 प्रतिशत हमले हुए हैं. इसके बाद इस्फ़हान (लगभग 8 प्रतिशत) और करमानशाह (लगभग 6 प्रतिशत) में हुए हैं. खुज़ेस्तान, अल्बोर्ज़ और कई पश्चिमी प्रांतों में भी हमले हुए हैं.
- ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने कहा कि विनाश का दायरा चिकित्सा सुविधाओं तक ही सीमित नहीं है. इसके हेड डॉ. पीर हुसैन कोलिवंद ने कहा कि हाल के हवाई हमलों में करीब 10,000 रेसिडेंशियल और कमर्शियल यूनिट्स को नुकसान पहुंचा है.
- इमरजेंसी टीमों के जमीनी आकलन के मुताबिक, 7,943 रेजिडेंशियल यूनिट्स, 1,617 कमर्शियल यूनिट्स हमलों का शिकार हुई हैं. 32 दवा और चिकित्सा केंद्र के साथ ही 65 स्कूलों को भी नुकसान पहुंचा है. रेड क्रिसेंट की 13 सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है.
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