ईरान में विद्रोह कुचलने के लिए बुलाए गए भाड़े के विदेशी लड़ाके, तीर्थयात्री बनकर इराक से घुसे

अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ईरान अपने ही नागरिकों की शांतिपूर्ण आवाज को दबाने के लिए हिज्बुल्लाह और इराकी मिलिशिया जैसे आतंकी संगठनों का इस्तेमाल कर रहा है.

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ईरान में आयतुल्ला अली खामेनेई सरकार ने अपने खिलाफ हो रही बगावत को कुचलने के लिए अब विदेशी लड़ाके बुला लिए हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इराकी शिया मिलिशिया लड़ाके तीर्थयात्रियों के भेष में ईरान पहुंच रहे हैं ताकि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों से निपटने में सुरक्षाबलों की मदद कर सकें. 

60 बसों में सवार होकर इराक से पहुंचे

अमेरिकी न्यूज आउटलेट 'द मीडिया लाइन' की रिपोर्ट के अनुसार, शलमचेह बॉर्डर पार करके 50 सीट वाली कम से कम 60 एक जैसी बसें ईरान में दाखिल हुई है, जिनमें सिर्फ युवा पुरुष सवार थे. माना जा रहा है कि ये सभी ईराकी मिलिशिया के लड़ाके थे. शलमचेह सीमा पर तैनात इराकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी अली डी ने बताया कि 11 जनवरी के बाद से कम से कम 60 बसें ईरान-ईराक सीमा पार कर चुकी हैं. इन बसों में सवार युवाओं का कहना था कि वो ईरान में तीर्थयात्रा के लिए जा रहे हैं. लेकिन उनके पहनावे और वेशभूषा से नहीं लगा कि वो तीर्थयात्री हैं. 

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तीर्थयात्रियों के भेष में पहुंचे ईरान

ये बसें धार्मिक यात्रा के नाम पर निकली थीं, लेकिन इनका स्वरूप संदिग्ध था. आम तौर पर तीर्थयात्रा करने वाले परिवारों में बुजुर्ग और बच्चे शामिल होते हैं. बसें अलग अलग तरह की होती हैं. उन बसों पर तीर्थयात्रा कराने वाली कंपनियों या दफ्तरों के बैनर लगे होते हैं. लेकिन इन बसों में केवल युवा पुरुष थे जिन्होंने एक जैसी काली शर्ट पहन रखी थी. हैरानी की बात ये भी है कि सीमा पर इन बसों की कोई तलाशी नहीं हुई और न ही ये बताया गया कि ये कहां जा रही हैं. 

इराकी मिलिशिया कमांडर की पोस्ट

ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया इमाम अली ब्रिगेड के कमांडर अबू अजरायल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें इराक की सरकारी नंबर प्लेट वाले सैन्य वाहन इराकी फेडरल पुलिस की 8वीं यूनिट से निकलते दिख रहे हैं. अजरायल ने पोस्ट में लिखा कि जो लोग तीर्थस्थलों को जलाते हैं, संस्थानों पर हमला करते हैं, वो न तो क्रांतिकारी है और न ही सुधारक बल्कि वो देश के दुश्मनों की कठपुतलियां हैं जो अराजकता की आड़ में अपना एजेंडा लागू कर रहे हैं. 

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अमेरिका ने कहा, ये जनता से विश्वासघात

उधर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्टों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. मंत्रालय ने एक पोस्ट में कहा कि ईरान अपने ही नागरिकों की शांतिपूर्ण आवाज को दबाने के लिए हिज्बुल्लाह और इराकी मिलिशिया जैसे आतंकी संगठनों का इस्तेमाल कर रहा है. ईरानी सरकार ने जनता के अरबों डॉलर इन आतंकी संगठनों पर खर्च किए हैं और अब उन्हें अपने ही लोगों के ही खिलाफ उतारना ईरानी जनता के साथ बड़ा विश्वासघात है. 

जगह-जगह विरोध की आवाज दबाने में जुटे

ईरान में विपक्षी नेता मेहदी रजा ने भी ईरान में इराकी मिलिशिया लड़ाकों के मौजूद होने पुष्टि की है. उन्होंने मीडिया लाइन से कहा कि एक हफ्ते से ईराकी मिलिशिया जगह-जगह विरोध की आवाज को दबाने में जुटे हुए हैं. इनमें से कई लड़ाकों को सरकारी और सैन्य कार्यालयों की सुरक्षा में तैनात किया गया है.  अहवाज जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों ने ऐसे सुरक्षाकर्मियों को देखा है जो इराकी लहजे में अरबी बोल रहे थे.

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गरीब युवाओं को थमाए हथियार

ईरान में विद्रोह को दबाने के लिए गरीब युवाओं को लालच देकर भर्ती किया गया है. मीडिया लाइन के मुताबिक, 37 वर्षीय मोहम्मद इयाद की मां ने खुलासा किया कि उनके बेटे को इराकी हिजबुल्लाह ग्रुप ने 600 डॉलर प्रति माह के वेतन पर ईरान की इस्लामी क्रांति की हिफाजत करने के लिए भर्ती किया है. इयाद तीन साल से बेरोजगार था और परिवार के विरोध के बावजूद काम की तलाश में 6 जनवरी को बसरा के रास्ते ईरानी सीमा पर चला गया. इंटरनेट बंद होने से अब उसका परिवार उससे संपर्क नहीं कर पा रहा है.

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