ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें अब 1000 से भी कम, ड्रोन हमले भी घटे... NDTV से बोले यूरेशिया ग्रुप अध्यक्ष

यूरेशिया ग्रुप के इयान ब्रेमर ने NDTV से कहा कि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों का स्टॉक हज़ार से कम रह गया है और ड्रोन हमले घटे हैं. उनके मुताबिक लॉन्च सुविधाओं को नुकसान और इंटरसेप्टर उपलब्धता में कमी के बीच युद्ध का अंत अभी साफ़ नहीं दिखता.

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  • यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष ब्रेमर के अनुसार ईरान की हथियार, सैन्य क्षमता में 7 दिनों में स्पष्ट कमजोरी आई है
  • ईरान के पास अब हजार से कम बैलिस्टिक मिसाइलें बची हैं और ड्रोन की संख्या भी पहले जैसी नहीं रही है
  • हिज्बुल्लाह और ईरान समर्थित अन्य नेटवर्क की मारक क्षमता पहले के मुकाबले काफी कमजोर पड़ गई है
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नई दिल्ली:

ईरान और इजरायल (Iran-Israel War) के बीच के चल रहे संघर्ष ने पूरी दुनिया की सिरदर्दी बढ़ा दी है. मिडिल ईस्ट संकट के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि ईरान में चल रहा युद्ध आखिर कब तक चलेगा. इसका जवाब फिलहाल तो किसी के पास नजर नहीं आ रहा, लेकिन यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर का कहना है कि केवल 7 दिन में ही ईरान हथियारों और क्षमता के मामले में विजिबिली कमजोर दिखने लगा है. उनका आकलन बताता है कि ग्राउंड और सैन्य स्थिति इतनी तेजी से बदल रही है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस ओर जाएगा, इसका कुछ नहीं पता.

ईरान के पास अब ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें नहीं बचीं

एनडीटीवी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इयान ब्रेमर ने कहा कि ईरान अब हफ्ते की शुरुआत जैसी संख्या में ड्रोन नहीं छोड़ पा रहा है और बैलिस्टिक मिसाइलें, वे इस समय कुल मिलाकर एक हजार से भी कम बची हैं. उन्होंने कहा कि ईरान की कई लॉन्च फैसिलिटीज तबाह हो गई हैं, और इंटरसेप्टर की उपलब्धता भी कम हो रही है. उनके मुताबिक इस संघर्ष में मारक क्षमता भले ही कम हो गई है, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध खत्म हो गया है. कम इंटरसेप्टर होने की स्थिति में ईरान का “एक भी ड्रोन हिट” भारी संकट खड़ा कर सकता है.

हिजबुल्लाह और अन्य ईरानी समर्थित नेटवर्क कमजोर पड़े

ब्रेमर ने कहा कि हिज्बुल्लाह ने सिर्फ छह मिसाइलों से इसकी शुरुआत की. पहले जहां वे 40, 50, 100 मिसाइलें एक साथ दागते थे, अब संख्या बहुत कम हो गई है. हुती (Houthis) समूह से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि कई लोगों का मानना था कि उनका दखल बड़ा गेमचेंजर होगा. यह संकेत है कि ईरान के सहयोगी नेटवर्क भी पहले जैसी ताकत नहीं दिखा पा रहे.

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ट्रंप के ‘अनकंडिशनल सरेंडर' बयान पर चुटकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि युद्ध तभी खत्म होगा जब ईरान बिना शर्त के सरेंडर करेगा. इयान ब्रेमर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि ट्रंप ने 12-day war में भी यही दावा किया था, जबकि कोई “अनकंडिशनल सरेंडर” नहीं हुआ था. यह लड़ाई तब खत्म होगी जब ट्रंप यह ऐलान करने का फैसला करेंगे कि उन्होंने अमेरिकी इतिहास के किसी भी प्रेसिडेंट से बेहतर अपने सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं. वह किसी न किसी समय ऐसा जरूर करेंगे, लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि यह जल्द ही होने वाला है." 

युद्ध पर ब्रेमर का विश्लेषण

ब्रेमर ने बताया कि इसका नतीजा भी शक के घेरे में होगा. उन्होंने आगे कहा, "मान लीजिए कि युद्ध खत्म हो गया है और उस समय बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं और फिर ईरानी सरकार आकर अपने ही लोगों को फिर से मार रही है. यूनाइटेड स्टेट्स क्या करने वाला है? उस समय यह अमेरिकी प्रेसिडेंट की एक बहुत बड़ी पर्सनल गलती लगेगी, जिसका मतलब है कि युद्ध लोगों की उम्मीद से कहीं ज़्यादा लंबा चल सकता है." यह पूछे जाने पर कि क्या ऐसी स्थिति की संभावना है जहां कोई शासन परिवर्तन न हो और दोनों पक्ष बस लड़ाई से दूर चले जाएं.

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उन्होंने कहा कि यह सबसे ज़्यादा संभावित स्थिति है, लेकिन इस पर भरोसा कम है, यह देखते हुए कि हम इसमें कितनी जल्दी हैं और ईरान के अंदर कुछ अंदरूनी लड़ाकू ताकतें कितनी ज़्यादा हिम्मत वाली हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि इससे शासन कमज़ोर हो जाएगा और उन्हें कई मोर्चों पर लड़ाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें कुर्द और उनकी अपनी आबादी भी शामिल है. यह बेसलाइन स्थिति है, लेकिन मुझे नहीं पता कि मुझे इस पर बहुत भरोसा है या नहीं.

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