- पाकिस्तान- सऊदी ने एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया है, एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा
- ईरान ने सऊदी पर हमला किया जबकि तालिबान भी पाकिस्तान पर हमला कर रहा है, लेकिन दोनों एक दूसरे की मदद नहीं कर रहे
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस से फोन पर बात कर बस क्षेत्र में शांति की दुआएं की
पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मिलकर तथाकथित मुस्लिम नाटो की नींव रखी थी और इसमें कई देशों को शामिल करने की कवायद शुरू की थी. लेकिन एक साल भी नहीं हुए कि यह केवल हवा-हवाई बातों वाला गठबंधन नजर आने लगा है. दरअसल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा' समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके अनुसार उनमें से किसी भी देश पर किसी भी हमले को ‘दोनों के विरुद्ध आक्रमण' माना जायेगा. अब सऊदी पर ईरान ने हमला कर दिया है तो पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में बैठे तालिबानी हमला कर रहे हैं. ऐसे में दोनों देश एक दूसरे की मदद करना तो दूर, बस एक दूसरे को शब्दों का मरहम लगाए जा रहे हैं.
गोला-बम नहीं बस दुआ भेज रहा पाकिस्तान
अभी की खबर यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की और क्षेत्र में युद्ध फैलने के डर के बीच “एकजुटता” जताई. यह फोन बातचीत उस समय हुई जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात बिगड़ गए, और ईरान द्वारा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले करने से बड़ा संघर्ष छिड़ने का खतरा बढ़ गया. सऊदी ने अपने क्षेत्र पर ईरान के हमले की पुष्टि कर दी है और कहा है कि हम जवाब देने का अधिकार रखते हैं.
ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ़ ने X पर एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और “ईरान पर इजरायली हमले और उसके बाद खाड़ी क्षेत्र में हुए हमलों से पैदा हुई खतरनाक क्षेत्रीय तनाव की पाकिस्तान की कड़ी निंदा” जताई. उन्होंने कहा, “इस खतरनाक समय में पाकिस्तान, सऊदी अरब और हमारे भाई खाड़ी देशों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है.”
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत अगर किसी तीसरे देश द्वारा हमला होता है तो दोनों एक-दूसरे की मदद करने के लिए बाध्य हैं. लेकिन दो बार अफगानिस्तान से पाकिस्तान की जंग छिड़ गई और सऊदी मदद के लिए नहीं आया. अब ईरान ने सऊदी पर हमला किया है और शहबाज दुआएं भेज रहे हैं.
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