ट्रंप की धमकी का असर? 38 दिन बाद आया 45 दिन की शांति का प्रस्ताव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को धमकियों के बीच शांति का प्रस्ताव भी आया है. यह प्रस्ताव जंग के 38वें दिन आया है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी सुप्रीम लीडर मुज्तबा अली खामेनेई.
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  • ईरान-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने एक शांति प्रस्ताव तैयार किया है
  • प्रस्ताव में 45 दिनों के लिए सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने का सुझाव दिया गया है
  • ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिन की डेडलाइन दी थी, जो मंगलवार रात खत्म हो रही है
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ईरान-अमेरिका की जंग में एक ओर बमबारी हो रही है, मिसाइलें दागी जा रही हैं तो दूसरी शांति को लेकर बातचीत भी चल रही है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग को रोकने के लिए एक शांति प्रस्ताव सामने आया है. हालांकि, यह प्रस्ताव सीधे तौर पर ईरान की ओर से नहीं आया है. बल्कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे मध्यस्थों की तरफ से तैयार किया गया है. इस प्रस्ताव में 45 दिनों के सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात कही गई है.

शांति का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने में कुछ ही घंटे बचे हैं. होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए उन्होंने 10 दिन का समय दिया था. उसकी डेडलाइन अमेरिका के समय के हिसाब से मंगलवार रात 8 बजे खत्म हो रही है. ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता है तो बहुत बड़ा हमला किया जाएगा.

इस बीच बताया जा रहा है कि अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देश 45 दिनों के सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं. अगर यह सीजफायर हो जाता है तो यह जंग भी खत्म हो सकती है.

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शांति का यह प्रस्ताव क्या है?

मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान की ओर से तैयार किए गए इस शांति प्रस्ताव को दो चरणों में लागू करने की बात है. पहले चरण में 45 दिन के सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात कही गई है. जबकि, दूसरे चरण में 15-20 दिन के भीतर एक स्थायी समझौते पर चर्चा का सुझाव है.

न्यूज एजेंसी AP ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस शांति प्रस्ताव को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मध्य पूर्व में ट्रंप के राजदूत स्टीव विटकॉफ को भेज दिया गया है. 

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि उन्होंन इस प्रस्ताव पर अपना जवाब तैयार कर लिया है और सही समय पर इसकी घोषणा करेंगे. उन्होंने कहा कि मध्यस्थों के चर्चा चल रही है लेकिन 'अल्टीमेटम, अपराधों और युद्ध अपराधों की धमकियों' के साथ इस बातचीत का कोई मतलब नहीं है.

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क्या हो पाएगा सीजफायर?

हर जंग का अंत बातचीत की टेबल पर ही होता है. लेकिन अभी तक ईरान या अमेरिका में से कोई भी बातचीत की टेबल पर आने को तैयार नहीं है.

ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है. ईरान का कहना है कि जंग को रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए अमेरिका ने जो 15 शर्तें रखी हैं, वे बहुत ज्यादा हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि उनके पास भी अपनी मांगों की एक लिस्ट है, जिसे उन्होंने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक भेज दिया है.

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि एक तरफ डरा रहे हो, अल्टीमेटम दे रहे हो और दूसरी तरफ बात कर रहे हो, ऐसा नहीं चलेगा. कूटनीति में धमकियों की कोई जगह नहीं होती. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी छोटे-मोटे या थोड़े दिन के सीजफायर के लिए होर्मुज को नहीं खोलेगा. खासकर ट्रंप की डेडलाइन के दबाव में आकर तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं करेगा.

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