भारत के जांबाज नौसेना अधिकारी कमांडर मयंक शर्मा को एक बड़े विमान हादसे के दौरान कई लोगों की जान बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने सम्मानित किया है. यह घटना 10 फरवरी 2026 की है, जब सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के पास एक विमान को तकनीकी खराबी के कारण समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग (डिचिंग) करनी पड़ी. उस समय कमांडर मयंक शर्मा संयुक्त राष्ट्र के मिशन पर सोमालिया में तैनात थे. विमान के पानी में गिरते ही स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी. एक तरफ समुद्र की चुनौतियां थीं और दूसरी तरफ सोमालिया जैसे अस्थिर क्षेत्र के सुरक्षा जोखिम भी था. ऐसे में कमांडर शर्मा ने अपनी जान की परवाह किए बिना कमान संभाली और रेस्क्यू में जुट गए.
मयंक शर्मा ने दिखाई गजब की सूझबूझ
विमान की 'वॉटर लैंडिंग' यानी डिचिंग के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पैनिक (घबराहट) को रोकना होता है. कमांडर मयंक शर्मा ने इस दौरान न केवल खुद को शांत रखा, बल्कि वहां मौजूद अन्य कर्मियों का भी हौसला बढ़ाया. उन्होंने बेहद कम वक्त में स्थिति का आकलन किया और तुरंत रिस्पॉन्स टीमों के साथ तालमेल बिठाकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करवाया. इस जल्दबाजी में उनके फैसले की वजह से हालात बेकाबू होने से बच गए और कोई अनहोनी नहीं हुई.
कमांडर शर्मा ने जिस पेशेवर अंदाज और रणनीतिक समझ का परिचय दिया है, इसके लिए उनकी जितनी सराहना की जाए कम है. उनके नेतृत्व में चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि भारतीय नौसेना अपने जवानों को किस कदर ट्रेन करती है.
संयुक्त राष्ट्र से मिला सम्मान
कमांडर शर्मा की इस जांबाजी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने उन्हें औपचारिक रूप से सम्मानित किया. यूएन की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र में उनके साहस, नेतृत्व और पेशेवर व्यवहार की जमकर तारीफ की गई. अधिकारियों ने कहा कि कमांडर मयंक शर्मा का आचरण अंतरराष्ट्रीय शांति सेना के उच्चतम मानकों के अनुरूप है.
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर से सबक: ड्रोन‑मिसाइल खतरे से निपटने के लिए सेना खरीदेगी नेक्स्ट‑जेन एयर डिफेंस गन














