- भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और सकारात्मक परिणाम के बेहद करीब हैं
- भारत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात के संदर्भ में अलग नहीं देखता बल्कि दोनों बाजारों को समान महत्व देता है
- यूरोपीय संघ के समझौते को भारत एक आदर्श मॉडल मानता है जिसमें फ्रंट लोडेड टैरिफ और नॉन टैरिफ बैरियर्स शामिल हैं
सरकारी सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया है कि भारत और अमेरिका ने अपने चल रहे व्यापार समझौते वार्ता (Trade Deal) में अत्यंत महत्वपूर्ण प्रगति की है और सकारात्मक परिणाम के बहुत करीब हैं. सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर राजनीतिक सहमति बनने के बावजूद अमेरिकी पक्ष में काम जारी रहा. सूत्रों ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि यूरोपीय संघ का समझौता वाशिंगटन के साथ सौदेबाजी की रणनीति से प्रेरित था. सूत्रों ने कहा कि अंतिम दिन सीमित भारत-यूरोपीय संघ वार्ता में अमेरिका का एक बार भी जिक्र नहीं हुआ. उन्होंने तर्क दिया कि यूरोपीय संघ का समझौता अपनी खूबियों और समय-सीमा के आधार पर किया गया था.
पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद
साथ ही, सरकार ने संकेत दिया कि वह अमेरिका के साथ संबंधों पर कड़ी नजर रख रही है. अमेरिकी बाजार को उतना ही महत्वपूर्ण, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यूरोपीय संघ के साथ समझौते के अंतिम चरण के दौरान दोनों वार्ताकार दल लगातार संपर्क में रहे. एक सूत्र ने कहा, "व्यापार वार्ताकार अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ भी संपर्क में थे." फिलहाल अमेरिका से बातचीत जारी है और दिल्ली पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद रखती है.
EU समझौते के कारण टला?
सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत यूरोपीय संघ और अमेरिका को निर्यात को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखता है. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता निर्यात को दोनों देशों में बढ़ाना है, क्योंकि इससे अंततः भारत में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलता है. सूत्रों ने यूरोपीय संघ के विशाल आकार का हवाला दिया, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा आयात बाज़ार बताया गया है, और सुझाव दिया कि भारत यूरोपीय संघ के समझौते को एक आदर्श के रूप में देखता है कि वह प्रमुख बाजारों से कैसे निपटना चाहता है: जहां संभव हो, फ्रंट लोडेड टैरिफ एडवांटेज, नॉन टैरिफ बैरियर्स को दूर करने के लिए तंत्र, और एक ऐसी संरचना, जिसका समय के साथ रिव्यू और विस्तार किया जा सके.
हालांकि सूत्रों ने भारत-अमेरिका समझौते के सटीक मॉडल का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने वार्ताओं को "मजबूत" और जारी बताया, जिससे संकेत मिलता है कि शेष मुद्दे इतने सीमित हैं कि निकट भविष्य में इसका रिजल्ट निकल सकता है. भारत एकसाथ कई द्विपक्षीय वार्ताओं को जारी रखेगा और साझेदारों से भी ऐसा ही करने की अपेक्षा करता है.
उद्योग जगत को भी संदेश
सरकार का सार्वजनिक संदेश उद्योग जगत को भी है. सरकार का संदेश है कि यूरोपीय संघ के साथ समझौता कोई भू-राजनीतिक दबाव नहीं है और अमेरिका के साथ वार्ता सफल होने के करीब है. भारत अपने निर्यातकों और निवेशकों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है कि व्यापार नीति सामरिक संकेतों के बजाय वाणिज्यिक परिणामों - बाजार पहुंच, स्थिर नियम और सप्लाई चेन एकीकरण को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है.













