रूस से तेल के आयात में बड़ी कटौती करेगा भारत? जानें क्‍या है सारा मामला  

बुधवार को रूस के कंपनियों पर लागू हुए नए अमेरिकी प्रतिबंध रूस के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की दूसरी कार्यकाल में पहली कार्रवाई हैं. ये प्रतिबंध ऐसे समय में आए हैं जब रूस के राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए ट्रंप की नाराजगी बढ़ रही है.

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नई दिल्‍ली:

आने वाले कुछ दिनों में भारत और रूस के बीच ऑयल ट्रेड में कुछ कमी आ सकती है. गुरुवार को इंडस्‍ट्री से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि भारतीय रिफाइनर रूस के दो प्रमुख ऑयल प्रोड्यूसर्स पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने के लिए आयात में तेजी से कटौती करने वाले हैं. माना जा रहा है कि इसके बाद अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट की राह में एक बड़ी अड़चन हट सकती है. अमेरिका की तरफ से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ थोपा गया है और इसमें से 25 फीसदी टैरिफ रूस से तेल खरीदने के जुर्माने के तौर पर है. 

2 रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध 

रूस ने साल 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था. उसके बाद से भारत सस्ते समुद्री मार्ग से आने वाले रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. इस साल के पहले नौ महीनों में लगभग 1.7 मिलियन बैरल प्रति दिन का आयात किया गया. लेकिन हाल ही में अमेरिका के एक फैसले ने इस ट्रेड का रास्‍ता मुश्किल कर दिया है. अमेरिका ने रूस के दो सबसे बड़े ऑयल प्रोड्यूसर्स लुकॉइल और रोजनेफ्ट पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. 

भारत की बड़ी खरीदार कंपनियां 

न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज जो रूस के कच्चे तेल की सबसे बड़ी भारतीय खरीदार है, रूसी तेल के आयात को कम या पूरी तरह रोकने की योजना बना रही है. इसमें रोजनेफ्ट के साथ बड़े लंबे समय तक चलने वाले समझौतों के तहत की जाने वाली खरीद भी शामिल है. रिलायंस के प्रवक्ता के हवाले से रॉयटर्स ने बताया है, 'रूसी तेल आयात का पुनर्मूल्यांकन जारी है और रिलायंस सरकार के दिशानिर्देशों के पूरी तरह से अनुरूप रहेगा.' 

सरकार की तरफ से कोई टिप्‍पणी नहीं 

सूत्रों के अनुसार भारतीय सरकारी रिफाइनर, जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्प (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्प (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प (HPCL) शामिल हैं, अपने रूसी ऑयल ट्रेड डॉक्‍यूमेंट्स की समीक्षा कर रहे हैं ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद कोई सप्‍लाई सीधे रोजनेफ्ट और लुकॉइल से नहीं आएगी. हालांकि तेल मंत्रालय और इन रिफाइनर्स की तरफ से इस मामले पर कोई टिप्पणी फिलहाल नहीं की गई है. 

बुधवार को रूस के कंपनियों पर लागू हुए नए अमेरिकी प्रतिबंध रूस के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की दूसरी कार्यकाल में पहली कार्रवाई हैं. ये प्रतिबंध ऐसे समय में आए हैं जब रूस के राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए ट्रंप की नाराजगी बढ़ रही है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कंपनियों को रूस के तेल उत्पादकों के साथ लेन-देन समाप्त करने के लिए 21 नवंबर तक का समय दिया है. 

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