भारत रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं कर रहा: रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार

इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकोनॉमी एंड इंटरनेशनल रिलेशंस के इंडो-पैसिफिक रीजन सेंटर के प्रमुख एलेक्सी कुप्रियानोव ने इजवेस्टिया को बताया कि उनके विचार में, भारत अगर रूसी तेल खरीद बंद करता है तो भारत की ऑयल रिफाइनिंग क्षेत्र में वृद्धि धीमी हो जाएगी.

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भारत और रूस के संबंध बहुत गहरे रहे हैं.
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  • भारत रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं कर रहा है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को प्राथमिकता देता है
  • भारत की सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा सर्वोपरि है
  • रूस और भारत के बीच ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन के तहत मजबूत और घनिष्ठ संबंध हैं
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रूस में भारत राजदूत विनय कुमार ने कहा है कि भारत रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं कर रहा है. भारत वही खरीदता है, जो उसके लिए सबसे अच्छा हो. सवाल यह नहीं है कि इस पर प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं. यह देश की सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा हितों, विशेष रूप से जनता की ऊर्जा आवश्यकताओं का मामला है. इसलिए, हम आर्थिक लाभ को ध्यान में रखते हुए आपका तेल खरीदना जारी रखेंगे. हमारी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी उपाय करेगा और यह एक राष्ट्रीय हित है - भारत की 1.4 अरब जनता की ऊर्जा सुरक्षा. 

रूस की मीडिया में क्या

इजवेस्टिया को विनय कुमार ने बताया कि उनके अनुसार, भारत उन सभी उपायों या कार्रवाइयों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है जो "भारत की संप्रभुता का उल्लंघन" करते हैं. रूसी समाचार एजेंसी तास से लेकर रूस के सभी अखबारों और वेबसाइट्स में विनय कुमार के इस बयान को काफी प्रमुखता से छापा गया है. इन खबरों का निचोड़ ये है कि रूस और भारत के बीच मजबूत संबंधों को देखते हुए, जो ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के भीतर घनिष्ठ सहयोग से भी बंधे हैं, अमेरिका की तरफ से नई दिल्ली को रूसी तेल आयात पर रोक लगाने के लिए बाध्य किए जाने की संभावना नहीं है. हालांकि, वाशिंगटन खरीद की मात्रा में काफी कमी ला सकता है. 

एक्सपर्ट्स का दावा

इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकोनॉमी एंड इंटरनेशनल रिलेशंस के इंडो-पैसिफिक रीजन सेंटर के प्रमुख एलेक्सी कुप्रियानोव ने इजवेस्टिया को बताया कि उनके विचार में, भारत अगर रूसी तेल खरीद बंद करता है तो भारत की ऑयल रिफाइनिंग क्षेत्र में वृद्धि धीमी हो जाएगी और घरेलू पेट्रोल की कीमतें बढ़ जाएंगी. इसके अलावा, इससे तेल बाजार में आपूर्ति की कमी होगी और वैश्विक कीमतें बढ़ेंगी. भारतीय राजनीतिक वैज्ञानिक राकेश भदौरिया ने यह बात कहा, "अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देता है, तो यह संकेत होगा कि उसने अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं और इससे देश की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति कमजोर होगी."

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