'भारत के बिना नहीं चलेगा यूरोप का काम': EU के साथ शिखर सम्मेलन में इन 3 डील पर लगेगी मुहर

India-EU Summit: विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के लिए यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि कॉया कॉलस ने बुधवार, 21 जनवरी को कहा कि भारत यूरोप के आर्थिक लचीलेपन के लिए "अपरिहार्य" बनता जा रहा है.

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India-EU Trade Deal: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के अगले सप्ताह की शुरुआत में भारत आने की उम्मीद
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  • यूरोपीय संघ के टॉप लीडर गणतंत्र दिवस समारोह और EU-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं
  • यूरोपीय संघ ने कहा है कि भारत यूरोप के आर्थिक लचीलेपन के लिए अहम है, वो अपरिहार्य है
  • 16वें EU-भारत शिखर सम्मेलन में एक नया व्यापक रणनीतिक एजेंडा अपनाया जाएगा जो 2030 तक साझेदारी को दिशा देगा
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India-EU Summit: गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने के लिए और 27 जनवरी को 16वें EU-भारत शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यूरोपीय संघ के टॉप लीडर भारत आने वाले हैं. इस बेहद अहम दौरे के पहले विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के लिए यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि, कॉया कॉलस ने बुधवार को बताया कि भारत पूरे यूरोप के लिए क्यों मायने रखता है. यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए, कॉया कॉलस ने कहा कि भारत यूरोप के आर्थिक लचीलेपन के लिए "अपरिहार्य" बनता जा रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि यूरोपीय संघ नई दिल्ली के साथ व्यापार, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों से लोगों के संबंधों के लिए एक शक्तिशाली नए एजेंडे पर काम करने के लिए तैयार है.

उनकी यह टिप्पणी नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की तेज तैयारियों के बीच आई है, जिसमें यूरोपीय संघ का शीर्ष नेतृत्व भाग लेगा और उम्मीद है कि इसमें कई ठोस नतीजे सामने आएंगे.

आगामी बैठक को नई राजनीतिक गति के साथ एक "महत्वपूर्ण क्षण" बताते हुए, कॉलस ने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत ऐसे समय में एक साथ आगे बढ़ रहे हैं जब नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था युद्ध, जबरदस्ती और आर्थिक विखंडन के कारण ऐसे दबाव में है, जो पहले कभी देखने को नहीं मिला. उन्होंने कहा कि दो प्रमुख लोकतंत्र संकोच नहीं कर सकते. उन्होंने तर्क दिया कि दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 21वीं सदी के लिए जरूरी एक प्रभावी बहुपक्षीय प्रणाली को बनाए रखने की जिम्मेदारी साझा करते हैं.

यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व का यह दौरा क्यों अहम?

16वें EU-भारत शिखर सम्मेलन के केंद्र में एक नए, व्यापक संयुक्त यूरोपीय संघ-भारत रणनीतिक एजेंडे को अपनाना होगा, जो 2030 तक साझेदारी के रास्ते को डिसाइड करेगा. कॉलस के अनुसार, यहां नेता केवल अपने इरादे को जाहिर करने वाले बयान जारी नहीं करेंगे बल्कि रिश्ते को "शब्दों से कार्यों तक" ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए "ठोस डिलिवरेबल्स" का समर्थन करेंगे.

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यहां तीन पहलों पर मुहर लगेगी:

  1. सबसे पहले, दोनों पक्षों का लक्ष्य लंबे समय से लंबित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत समाप्त करना है. कॉलस ने कहा कि यह डील बाजार को खोलेगी, टैरिफ बाधाओं को दूर करेगी और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगी.
  2. दूसरा, यूरोपीय संघ बुधवार को एक नई यूरोपीय संघ-भारत सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर के साथ आगे बढ़ने पर सहमत हुआ है. इस समझौते से समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और साइबर-रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार होगा और इसके साथ ही सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत भी शुरू होगी. कॉलस ने सांसदों से कहा, "इस अधिक खतरनाक दुनिया में, हम दोनों को एक साथ मिलकर काम करने से फायदा होगा."
  3. तीसरा, दोनों पक्ष गतिशीलता पर सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचे पर एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की योजना बना रहे हैं. इससे मौसमी श्रमिकों, छात्रों, रिसर्चर्स और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है. साथ ही रिसर्च और नवाचार (इनोवेशन) में सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा, एक ऐसा क्षेत्र जिसे दोनों दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र के रूप में देखते हैं.

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